हिंदी शोध संसार
तकनीक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
तकनीक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 18 मार्च 2012

आपके कंप्यूटर के लिए सुंदर, आकर्षक और मुफ्त हिंदी फॉट

मैं अपने ब्लॉग के लिए सुंदर हिंदी फॉट की तलाश में था। तलाश पूरी हुई। और मैंने अपने ब्लॉग की फॉंट सैटिंग भी कर ली है। इसके बाद मेरा ब्लॉग सुंदर दिखने लगा है। आप भी अपने ब्लॉग को सुंदर, आकर्षक और मनोरम बना सकते हैं। मगर, ये ब्लॉग अपने सुंदर रूप में तभी दिखेगा जब आपके कंप्यूटर में ये फॉट इंस्टॉल हो।
आपके कंप्यूटर के लिए सुंदर, आकर्षक और मुफ्त हिंदी फॉट यहां से डॉऊनलोड किए जा सकते हैं।
1. सिद्धांत
2. अपराजिता और कोकिला फॉंट
3. लोहित

शनिवार, 28 जनवरी 2012

स्क्राइब फायर ऊबंटू के लिए उत्तम ब्लॉग एडिटर

 
पिछले कई दिनों से ऊबंटू ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक उत्तम ब्लॉग एडिटर की खोज कर रहा था। ब्लॉगिलो जैसे कई ब्लॉग एडिटरों को आजमाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सफल नहीं हुआ। अंत में मुझे स्क्राइब फायर मिला। स्क्राइबफायर कई मायनों में विंडो लाइव राइटर की तरह है।

यह एक बेहतर एडिटर है। जिसे आप अपने वेब ब्राऊजर में जोड़कर सीधे वहां से लेख प्रकाशित कर सकते है।

शनिवार, 6 अगस्त 2011

स्क्राइबस- एक बिल्कुल मुफ्त और उत्तम डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर



स्क्राइबस एक मुफ्त डेस्कॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर है। जिसके माध्यम से आप प्रिंट के लिए तैयार साम्रगी तैयार कर सकते हैं। आप मैगजिन का ले-लाउट तैयार करना चाहते हैं या न्यूजलेटर। सबके लिए ये एक उत्तम सॉफ्टवेयर है।
इसे यहां से डाऊनलोड किया जा सकता है।

इसका इस्तेमाल सीखने के लिए तीन वीडियो मुहैया कराए गए हैं जिसे आप डाउनलोड करके इसके माध्यम से इस सॉफ्टवेयर का प्रयोग सीख सकते हैं-
वीडियो डाऊनलोड करना बिल्कुल आसान है ज्यादा जानकारी के लिए यहां जाएं।
अब एक झलकी। मैंने इस वीडियो को देखकर स्क्राइबस से एक पेज तैयार किया है- बताइये कैसा लगा।






गुरुवार, 16 जून 2011

किसी भी साइट से वीडियो डाऊनलोड करें।



वीडियो सीखने-सिखाने का बेहतर संसाधन है। मगर, ऑन लाइन वीडियो से सीखना सरदर्द से कम नहीं है। वहां धीमे इंटरनेट कनेक्शन के कारण बफरिंग की समस्या है। इसलिए वीडियो से सीखने के लिए वीडियो डाऊन किया जा सकता है। पर यहां भी समस्या है। कई वेवसाइट वीडियो लाऊनलोड करने के लिए पैसे वसूलते हैं। या फिर डाऊनलोडर खरीदने के लिए भारी भड़कम राशि की मांग होती है। मुफ्त डाऊनलोडर ठीक से काम नहीं करता या फिर हर साइट के लिए उपयुक्त नहीं होते। ऐसे में वीडियो डाऊनलोड हेल्पर वीडियो डाऊनलोड करने के लिए मुफ्त सॉफ्टवेयर का बेहतर विकल्प है।

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

ऊबंटू के साथ हमारा अनुभव



अक्सर कहा जाता है कि मुफ्त में क्या मिलता है। मगर, मुफ्त में कई बार ऐसी चीजें मिल जाती है तो ना सिर्फ बहुमूल्य होती है, बल्कि वह कई मायनों में खरीदी हुई चीजों से भी बेहतर हो सकती है। मुक्त स्रोत(ओपन सोर्स) में उपलब्ध कंप्यूर संसाधन तंत्र(ऑपरेटिंग सिस्टम) ऊबंटू के बारे में ऐसा ही कुछ कहा जा सकता है। ऊबंटू संसाधन तंत्र न सिर्फ मुफ्त है, बल्कि तेज और विश्वसनीय है। इस संसाधन तंत्र के इस्तेमाल के लिए विषाणुरोधी(एंटी वायरस) भी नहीं चाहिए।
…........................

इससे पहले भी कई बार उबंटू को अपने कंप्यूटर पर संस्थापित(इंस्टॉल) करने की कोशिश की। लेकिन सफल नहीं रहा। इसका एक और एकमात्र कारण था कि मैं ऊबंटू को उसके अंतर्जाल पृष्ठ(इंटरनेट पेज-साइट) से डाऊनलोड करके सीधे संस्थापित (इंस्टॉल) करने की कोशिश करता था। इस दौरान इसमें कुछ तक गड़बड़ी पैदा हो जाती थी और ऊबंटू संस्थापित नहीं हो पाता था.

तब ध्यान गया संस्थापित करने के चरणों पर जो कि ऊबंटू के डाऊनलोड पेज पर मौजूद है। ऊबंटू कैसे संस्थापित करें- विधियों के तहत डाऊनलोड पृष्ठ से ऊबंटू डाऊनलोड कर लिया और 700 एमबी के एक सीडी पर उसे बर्न(राइट) कर लिया। और फिर संस्थापित करने की कोशिश की। 
 

यहां एक बात और बताना चाहूंगा कि मेरे लैपटॉप(लाडला) में पहले से विंडो विस्टा संसाधन तंत्र मौजूद है। विस्टा के साथ ऊबंटू संस्थापित करने की कोशिश की। चरणबद्ध तरीके से सबकुछ होता गया। और अंत में लाडले पर ऊबंटू संस्थापित हो गया।

परेशानियां और उसका समाधान-
  1. ऊबंटू के साथ पहली जो परेशानी आई वो थी शब्दकूट(पासवर्ड) नहीं स्वीकार करना- शुरू शुरू में जब मैं उपभोक्ता(यूजरनेम) के साथ शब्दकूट(पासवर्ड) डालता था तो कंप्यूटर शब्दकूट असंगत बताता था। मैने सीडी से दोबारा ऊंबंटू संस्थापित करने की कोशिश की। पहले कंप्यूटर से ऊबंटू असंस्थापित हुआ, फिर संस्थापित हो गया। इसबार मैंने शब्दकूट(पासवर्ड) के साथ साथ उपभोक्ता(यूजरनेम) भी बदल दिया। इंस्टॉल करने के बाद कंप्यूटर फिर से चलाया। तो नए उपभोक्ता और शब्दकूट के साथ कंप्यूटर चल पड़ा।
    (परेशानी की वजह- विंडो विस्टा के उपभोक्ता(यूजरनेम) पर उबंटू को चलने की कोशिश की, इसलिए पासवर्ड नहीं ले रहा था। बाद में उपभोक्ता बदल दिया तो शब्दकूट काम करने लगा)


  2. दूसरी परेशानी इंटरनेट कनेक्शन को लेकर हुई। विंडो विस्टा पर इंटरनेट था, मगर ऊबंटू पर काम नहीं कर रहा था। मैंने खुद ऊबंटू पर इंटरनेट सैटिंग की। सैंटिग्स तो हो गया पर इंटरनेट शॉर्टकट के अभाव में काम नहीं हो पाया। मैने सेवा प्रदाता(सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क किया) उसने ब्राऊजर सैटिग्स चालू कर दिया और ये समस्या भी समाप्त हो गई।
  3. तीसरी समस्या- भाषा को लेकर थी जो इंटरनेट जुड़ते ही समाप्त हो गई। और पूरे कंप्यूटर पर हिंदी भाषा सेट हो गई। की-बोर्ड सैटिंग भी कर ली।
  4. चौथी समस्या डीवीडी प्लेयर को लेकर थी। ऊंबटू में मौजूद प्लेयर पर कुछ प्लग-इन डाऊनलोड कर लिया और डीवीडी भी चलने लगा।

इस तरह समस्याएं खत्म हो गई। ज्यों-ज्यों ऊबंटू का प्रयोग करता जा रहा हूं। यह मेरा पसंदीदा संसाधन तंत्र बनता जा रहा है। आगे और भी चर्चा करेंगे।

शनिवार, 15 जनवरी 2011

“गूगल बुक्स” से किताब डाऊन लोड कैसे करें।





गूगल बुक्स जालपर(ऑनलाइन) स्थित विशाल पुस्तकालय है। कुछ पुस्तकें तो मुफ्त हैं तो कुछ सर्वाधिकार सुरक्षित। अनुनाद सिंह जी ने करीब तीन सौ हिंदी पुस्तकों का लिंक अपने चिट्ठे पर दिया है. ये पुस्तकें बहुत ही उपयोगी हैं। ऐसे ही हजारों पुस्तकें गूगल बुक्स पर हैं। इन पुस्तकों को ऑन लाइन पढ़ना मुश्किल है। लेकिन डाऊनलोड करके पढ़ना और भी मुश्किल।

“गूगल बुक्स” से किताब डाऊन लोड कैसे करें।

गूगल बुक्स जालपर(ऑनलाइन) स्थित विशाल पुस्तकालय है। कुछ पुस्तकें तो मुफ्त हैं तो कुछ सर्वाधिकार सुरक्षित। अनुनाद सिंह जी ने करीब तीन सौ हिंदी पुस्तकों का लिंक अपने चिट्ठे पर दिया है. ये पुस्तकें बहुत ही उपयोगी हैं। ऐसे ही हजारों पुस्तकें गूगल बुक्स पर हैं। इन पुस्तकों को ऑन लाइन पढ़ना मुश्किल है। लेकिन डाऊनलोड करके पढ़ना और भी मुश्किल।

गुरुवार, 25 मार्च 2010

आओ ब्लॉग(चिट्ठा) बनाएं

जो बूझे सो ज्ञानी. जिन्हें आता है उनके लिए तो ये कुछ भी नहीं है, लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें अभी भी ब्लॉग बनाने नहीं आता है. कई वाकई पढ़े लिखे लोग हैं, जिन्हें छोटी-छोटी बातें मुश्किल सी लगती है. उनकी मुश्किल आसान करने के लिए ये पोस्ट लिखे जाएंगे.
ब्लॉग बनाने के लिए सबसे पहले-

  1. जी-मेल एकाउंट बनाना

  • एक जी-मेल एकाउंट बनाइये( अगर पहले से है तो सोने में सुहागा)- जी मेल एकाउंट बनाना आसान है. बस अपने ब्राउजर(विचरक- फायरफॉक्स, इंटरनेट एक्सप्लोरर, ओपेरा) की पते वाली जगह(यूआरएल में) WWW.GMAIL.COM टाइप कर एंटर कुंजी दबाएं.

25032010265 25032010263
लाल घेरा ब्राउजर का यूआरएल है इसी में GMAIL.COM टाइप करना है. और ENTER(एंटर कुंजी दबाना है)
25032010266 25032010267
एंटर दबाते ही पेज कुछ इस प्रकार खुलेगा, जिसमें लाल घेरे को चटकाएं(नहीं समझे, तो क्लिक करिए)
25032010269
नया पृष्ठ कुछ ऐसा खुलेगा, बस इस फॉर्म को भरिए, सबसे नीचे गूगल के नियम शर्तों को स्वीकार कर लीजिए बस बन जाएगा आपका जी-मेल खाता(एकाउंट). इस अकाउंट का उपयोग आप ब्लॉग बनाने के लिए करेंगे.

2. ब्लॉग बनाना

25032010263 25032010265
अपने विचरक(ब्राउजर) के पते(यूआरएल) में लिखें- WWW.BLOGGER.COM और एंटर कुंजी दबाएं
25032010252 25032010253
एंटर दबाते ही नया पृष्ट कुछ ऐसा खुलेगा, जिसमें अपने जी-मेल एकाउंट का यूजर नाम और पासवर्ड भर दें. और साइन-इन चटकाएं.
25032010254
साइन-इन चटकाते ही ये पृष्ठ खुलेगा. यहां आप लाल घेरे में वो नाम भरिए जो आप अपने ब्लॉग पर देखना चाहते हैं. फिर आप I accept the terms of service में क्लिक करें.  और आगे बढ़े.
25032010257
इस पृष्ठ पर Create your blog now को क्लिक करें.
25032010258_2
यहां आप अपने ब्लॉग का नाम रखेंगे. आपने अपने ब्लॉग के लिए जो नाम चुना है. उसको Blog address में भरिए फिर नीचे check avaibility क्लिक करिए. अगर उस नाम से नाम अनुपलब्ध है तो इसका मतलब इस नाम से पहले ही ब्लॉग बन चुका है. इसलिए कोई दूसरा नाम चुनिए इसे चेक करिए. तब तक चेक करिए जब तक वो नाम आपके लिए उपलब्ध नहीं मिल जाता.  नाम मिलते ही आप ब्लॉग शीर्षक blog title भी वही नाम भर दीजिए और CONTINUE को क्लिक करिए.
25032010259_2
अब इस पृष्ट में आप अपने लिए मनमुताबिक टेम्पलेट चुन लीजिए(नहीं पसंद है तो कोई बात नहीं, हम आपको एक-से बढ़कर एक टेंपलेट देंगे, फिलहाल इसी से काम चलाइये.) और जारी रहिए(CONTINUE).
25032010260_2
और मुबारक हो आपका ब्लॉग बन गया शुरू किए ब्लॉगिंग यानी चिट्ठाकारिता START BLOGGING को चटकाएं.
25032010261_2
व्यक्त करें अपनी भावना और प्रतिभा और प्रकाशित करें.
ब्लॉगिंग मुबारक हो.

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2009

पीडीएफ पुस्तक प्रकाशन- तथ्य और विमर्श

पीडीएफ पुस्तक प्रकाशन पर मेरी पोस्ट पर कुछ प्रतिक्रियाएं मिली. पीएन सुब्रह्मण्यन जी ने कहा कि इस विषय पर थोड़ा और विस्तार से बताया जाए. उन्हीं को समर्पित है मेरी ये पोस्ट-
दरअसल, हमारा हिंदी ब्लॉग जगत समृद्ध होता जा रहा है. कुराफातों  हो या व्यक्तिगत टिप्पणियां. ये सब मिलकर हिंदी ब्लॉग जगत को समृद्ध कर रहा है. सैंकड़ों ऐसे ब्लॉग हैं जिनपर स्तरीय हीं नहीं, उच्चस्तरीय लेख मौजूद हैं.  शब्दावली को ही लीजिए, यहां मौजूद पोस्ट हिंदी भाषा विज्ञान की धरोहर हैं. मैंने नॉर्मन लेविस की वर्ड पावर मेड ईजी पढ़ी थी. उन्होंने अंग्रेजी भाषा के शब्दों को याद रखना और समझना आसान बना दिया था. ऐसा ही कार्य अजीत वडनेरकर जी कर रहे हैं. इससे हिंदी भाषा को बहुत फायदा मिलेगा. उनकी रचना ब्लॉग पोस्ट को रूप में है. अगर उस ब्लॉग के सभी पोस्ट को एक जगह समेट कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाता है तो उससे लाखों लोग लाभान्वित होंगे.  
इसी तरह आपके ब्लॉग का विषय जो हो, आप उसे इकट्ठा कर पीडीएफ पुस्तक के रूप में प्रकाशित कर सकते हैं.
उदाहरण के लिए मैंने विकीपीडिया पर निर्वाचित लेखों को ओपेन ऑफिस में ज्यों का त्यों चिपका दिया. फिर इसे सेव एज पीडीएफ फाइल के रूप में सेव कर लिया. और पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया.
देखिए, विकीपीडिया के चौदह निर्वाचित लेखों की ये पुस्तक-

कई कारणों से किताब हटा दिया गया है.
अब आप भी अपने ब्लॉग पोस्ट को ओपेन ऑफिस में चिपकाइये और फिर पीडीएफ बनाकर प्रकाशित करिए.

सोमवार, 26 अक्टूबर 2009

अपना पीडीएफ पुस्तक कैसे प्रकाशित करें

1. सबसे पहले इम्बेडइट साइट पर जाकरपीडीएफ किताब अपलोड करें, लॉग इन करने की जरूरत नहीं है.
(नोट- अपनी पीडीएफ किताब बनाने के लिए, अपनी विषय-वस्तु ओपन ओफिस में चिपकाएं और एक्सपोर्ट एज पीडीएफ फाइल के रूप में सेव कर लें. इम्बेडइट में सीधे आपके कंप्यूटर से पीडीएफ फाइल अपलोड की जा सकती है.)
2. फाइड अपलोड करने के बाद पूछेगा आप गूगल, ट्विटर आदि में से कहां साइन-इन करना चाहते हैं तो आप गूगल चुन लीजिए, हां दूसरा भी चुन सकते हैं.
3. लॉग इन करते ही आपको इम्बेड कोड मिलेगा. उसे आप अपने ब्लॉग के न्यू पोस्ट में जाकर एचटीएमएल में चिपका दीजिए.
3. हां सेव करते वक्त थोड़ी आपत्ति दिखाएगा, उसे स्टॉप शोइंग इरर बॉक्स में क्लिक करे समस्या को दूर सकते हैं. बस चंद सैकेंडों में आपकी किताब प्रकाशित हो गई.
यहां प्रस्तुत है शेखर एक जीवनी का पहला भाग

कई कारणों से किताब हटा दिया गया है.

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009

पुरानी पटकथा पर पुरानी वीडियो


करीब एक साल पहले बिहार के बाढ़ पर मैंने ये पटकथा लिखी थी. तकनीकी कारणों से वीडियो नहीं बना सका. अब जाकर ये वीडियो बन पाया है.

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2009

आपकी जरूरत के तमाम मुफ्त सॉफ्टवेयर-2

  1. विंडोज लाइव राइटर- हृदयांजलि के इस पृष्ठ पर आप जो पोस्ट देख रहे हैं वो विंडोज लाइव राइटर द्वारा प्रकाशित किए गए हैं. आप अपने ब्लॉग पोस्ट को और भी बढ़िया तरीके से लिखकर प्रकाशित कर सकते हैं. आप अपने कंप्यूटर में मौजूद चित्र, वीडियो आदि आसानी से अपने पोस्ट में जोड़ सकते हैं. आपको अपने पोस्ट को सजाने के लिए ऑनलाइन रहने की जरूरत नहीं है. ऑफ लाइन सजाइये और ऑनलाइन रहते हुए प्रकाशित कर डालिए. फोटो एलबम, तालिका, वीडियो आदि सबकुछ. आजमाइये.overview
  2. ओपेरा- ओपेरा एक बहुत ही बढ़िया, सुरक्षित और तेज जाल-विचरक यानी ब्राउजर है. आजमा सकते हैं मर्जी आपकी.thumb-panels
  3. केएमपी प्लेयर – केएमपी प्लेयर मेरा पसंदीदा ओडिया-वीडियो प्लेयर है. मैं इसे करीब डेढ़ साल से प्रयोग में ला रहा हूं. अच्छा क्या, मेरे लिए सबसे अच्छा प्लेयर है. इसकी त्वचा काफी सुंदर है. देखिए. 1434_KMPlayer1434

बुधवार, 14 अक्टूबर 2009

आपकी जरूरत की तमाम मुफ्त सॉफ्टवेयर

  1. ऑपन-ऑफिस:- ओपन ऑफिस एम एस ऑफिस का बहुत ही अच्छा और मुफ्त विकल्प है.  इसमें फाइल को पीडीएफ में भी जमा करने का विकल्प मौजूद है. साथ ही यह ग्राफिक्स और स्प्रीड शीट के रूप में बेहतर कार्य करता है.
  2. सुमात्रा पीडीएफ:- एडोब रीडर का बेहत विकल्प.  मात्र डेढ़ एमबी का छोटा फाइल.
  3. फॉक्सिट रीडर- एडोब रीडर का बेहतर विकल्प. एकदम तेज और तंदुरुस्त. साथ ही छोटा भी.
  4. फायर-फॉक्स- इस अंतर्जाल विचरक यानी ब्राउजर का को जवाब नहीं, दुनिया के बहुत से लोग इसके मुरीद हैं. मैं भी हूं. आप भी हो जाएंगे. एकदम तेज, सुरक्षित और बढ़िया.

काम के मुफ्त सॉफ्टवेय

  1. ऑपन-ऑफिस:- ओपन ऑफिस एम एस ऑफिस का बहुत ही अच्छा और मुफ्त विकल्प है. इसमें फाइल को पीडीएफ में भी जमा करने का विकल्प मौजूद है. साथ ही यह ग्राफिक्स और स्प्रीड शीट के रूप में बेहतर कार्य करता है.
  2. सुमात्रा पीडीएफ:- एडोब रीडर का बेहत विकल्प. मात्र डेढ़ एमबी का छोटा फाइल.
  3. फॉक्सिट रीडर- एडोब रीडर का बेहतर विकल्प. एकदम तेज और तंदुरुस्त. साथ ही छोटा भी.
  4. फायर-फॉक्स- इस अंतर्जाल विचरक यानी ब्राउजर का को जवाब नहीं, दुनिया के बहुत से लोग इसके मुरीद हैं. मैं भी हूं. आप भी हो जाएंगे. एकदम तेज, सुरक्षित और बढ़िया.

सोमवार, 12 अक्टूबर 2009

लिंगोज आपके लिए बढ़िया डिक्शनरी

अंतर्जाल पर दर्जनों डिक्शनरी मौजूद हैं. wordnet से लेकर oxford तक. लेकिन lingoes क्या कहना! लिंगोज एक साथ कई डिक्शनरियों की सुविधा देता है. साथ ही करेंसी कनवर्टर, वेट कनवर्टर, एडवान्स्ड कलकुलेटर, आदि बहुत कुछ. इसके साथ आप ग्रामर भी लोड कर सकते हैं. यानी जैक ऑफ मेनी ट्रेड्स एंड मास्टर ऑफ ऑल.
http://www.lingoes.net/en/lingoes128_8

बुधवार, 3 सितंबर 2008

क्रेजी किया रे

गुगल बाबा का क्रोम ब्राउजर वाकई क्रेजी करने वाला है. इसका आकार महज पांच सौ केबी के करीब है. अभी फीचर जानना बांकी है आप भी ट्राई करिए.

गुरुवार, 10 जुलाई 2008

इतिहास किसे माफ नहीं करेगा

भारत के परमाणु वैज्ञानिक अनिल काकोदकर का कहना है कि यदि अमेरिका के साथ परमाणु समझौता नहीं हुआ तो इतिहास कभी माफ नहीं करेगा.

उन्होंने ये भी कहा कि यह एक मौका है जब हम सिद्धांतों से समझौता किए बगैर भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकते हैं.

काकोदकर ने ये नहीं बताया कि देश किसे माफ नहीं करेगा, कांग्रेसियों को या वामपंथियों को या भाजपाईयों को या वैज्ञानिकों को.

देश के ज्यादातर वैज्ञानिक कह चुके हैं कि परमाणु समझौता देश हित में नहीं हैं फिर काकोदर उन वैज्ञानिकों को क्यों नहीं समझाते कि देश उन्हें माफ नहीं करेगा.

सरकार कई बार साफ कर चुकी है कि समझौता होने के बाद भी हम अपनी कुछ ऊर्जा जरूरतों का सात-से आठ प्रतिशत ही पूरा कर पाएंगे.

इस सात से आठ प्रतिशत ऊर्जा के लिए हम कितना बड़ा मूल्य चुकाने जा रहे हैं.

हमारे देश के शोध संस्थानों में शोध कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं हैं, कम वेतन को लेकर वैज्ञानिक शोध कार्य छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं. हर साल शोधार्थियों और शोधपत्रों की संख्या घटती जा रही है. छात्र कैरियर के रूप में विज्ञान को नहीं चुन रहे हैं. स्कूल-कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विज्ञान की पढ़ाई ठप पड़ती जा रही है, जो थोड़े बहुत प्रयोगशालाएं हैं उनमें उपकरणों से ज्यादा धूल जमें हैं. ऐसे में सरकार परमाणु तकनीक खरीदने के लिए क्यों उतावली हुई जा रही है और काकोदकर जैसे वैज्ञानिकों को इतिहास की दुहाई क्यों देनी पड़ रही है समझ में नहीं आता.

एक तरफ सरकार कहती है कि संसद को विश्वास में लिए बगैर वह आईएईए में नहीं जाएगी, दूसरी तरफ वह आईएईए को परमाणु सुरक्षा मसौदा सौंप आती है.

यह देश के साथ धोखा नहीं तो और क्या है.