यू-ट्यूब पर अनायास ही, बॉक्स-ऑफिस पेज पर चला गया. जहां दर्शको के लिए चुनिंदा हिंदी फिल्में देखने के लिए उपलब्ध है। बिल्कुल थियेटर के स्टाइल वाले स्क्रीन पर ऑन-लाइन फिल्म देखना वाकई शानदार अनुभव रहा।
दूसरी ओर, फिल्म समीक्षक, गौतम भास्करन कहते हैं कि इस फिल्म में कुछ भी भारतीय नहीं है. उन्होंने इस फिल्म को छिछला, संवेदनहीन करार दिया. प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक, सुभाष के झा इसे अतिमहत्वाकांक्षी, मगर निराशाजनक फिल्म बताते हैं. वे कहते हैं कि जिस पटकथा पर यह फिल्म बनी है, उस कथा पर मीरा नायर सलाम बांबे और सत्यजीत राय अपु त्रिलोजी बना चुके हैं. बीबीसी इस फिल्म पर कहता है कि यह भारतीय फिल्मों की नकल है. बीबीसी सलाह देता है कि अगर आप मुंबई की सच्चाई देखना चाहते हैं तो उठा लाइये रामगोपाल वर्मा की सत्या की डीवीडी.
अभिनेता अमीर खान ने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि यह भारतीय फिल्म है. आमिर ने कहा कि सर रिचर्ड एटिनबोरो की गांधी सही मायनों में एकमात्र भारतीय फिल्म थी. उन्होंने कहा कि स्लमडॉग भारत के बारे में है, लेकिन भारतीय फिल्म नहीं है. हमें आशा है कि यह फिल्म ऑस्कर में अच्छा करेगी. हमें नहीं लगता है कि यहां देशी या विदेशी से कुछ लेना-देना है. फिल्मकार प्रियदर्शन कहते हैं कि यह भारतीय व्यवसायिक सिनेमा की तरह है. चूंकि विदेशी लोग हमें गंदा, शोषित देखना पसंद करते हैं, इसमें मुंबई की खूबसूरती कहां है.
साहित्यकार सलमान रश्दी कहते हैं कि वे स्लमडॉग के बड़े फैन नहीं है. फिल्म में तीन-चार जगह स्टोरी लाइन तोड़ी गई है.
पुरस्कार और सम्मान
अखबारों और पत्र-पत्रिकाओं में फिल्म को खूब वाहवाही मिली. इस फिल्म को चार गोल्डन ग्लोब और ग्यारह बाफ्टा अवोर्ड मिले हैं. इसके साथ ही इसे ऑस्कर अवोर्ड के दस वर्गों में नामांकित किया गया है.
संगीत
स्लमडॉग के लिए संगीत दिया है ए आर रहमान ने. इस फिल्म के लिए रहमान को 2009 का गोल्डन ग्लोब बेस्ट ऑरिजिनल स्कोर अवार्ड मिला है. रहमान को ऑस्कर के तीन वर्गों में भी नामांकित किया गया है. वहीं गुलजार को जय हो के लिए ऑस्कर में नामांकित किया गया है.
फिल्म पर विवाद
छियासीवें गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड की घोषणा के बाद, शिकागो फिल्म समालोचकों ने डैन्नी बॉयल के साथ सह-निर्देशक लवलीन टंडन को भी सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार देने के लिए ऑनलाइन आंदोलन चलाया. आंदोलनकर्ता जैन लीसा हटनर का कहना है कि जब लवलीन फिल्म निर्माण प्रक्रिया में शामिल हुई तो पुरस्कारों में इन्हें दरकिनार क्यों किया गया. बाद में लवलीन ने कहा कि वे इस तरह के आंदोलन से शर्मिदगी महसूस करती हैं और उन्हें यह पुरस्कार नहीं चाहिए.
इस फिल्म पर मेगास्टार अमिताभ बच्चन की टिप्पणी से भी भारी विवाद खड़ा हुआ. अमिताभ की टिप्पणी कई मायने में महत्वपूर्ण है. चूंकि फिल्म की शुरुआत में अमिताभ द्वारा जमाल को ऑटोग्राफ देते दिखाया जाता है, अमिताभ ही कौन बनेगा करोड़पति के संचालक थे. तेरह जनवरी 2009 को अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर फिल्म के कुछ हिस्से पर भारी ऐतराज जताया. अमिताभ ने कहा, दुनिया में कहां गरीबी, मुखलिसी नहीं है, क्या विकसित देशों के लोग गरीब नहीं है, तो फिर विकासशील भारत की गरीबी को मजाक क्यों बनाया जाता है. आगे उन्होंने कहा कि एक भारतीय की किताब पर एक विदेशी ने फिल्म बनायी इसलिए इस फिल्म को गोल्डन ग्लोब मिल जाता है, अगर किसी विदेशी की ये फिल्म नहीं होती तो इसे यह पुरस्कार नहीं मिलता. अमिताभ की इस टिप्पणी पर भारी विवाद हुआ. बाद में अमिताभ ने अपनी टिप्पणी पर सफाई भी दी.
विरोध और कानूनी पक्ष
फिल्म के रिलीज होने के बाद इसकी व्यापक आलोचना हुआ. कई लोगों ने फिल्म के खिलाफ कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की. फिल्म पर देश की गरीबी को विदेशी नजरिये से देखने और दिखाने का आरोप लगाया गया. स्लम-ड्वेलर्स वेल्फेयर ग्रुप ने फिल्म के संगीतकार ए आर रहमान और अभिनेता अनिल कपूर के खिलाफ मानहानि का दावा भी ठोका. इन पर आरोप लगाया गया कि फिल्म में झुग्गी-झोपड़ी में रहनेवालों को गलत तरीके से दिखाया गया, जो मानवाधिकार का उल्लंघन है. फिल्म में स्लमडॉग शब्द के इस्तेमाल पर भी ऐतराज जताया गया. सामाजिक कार्यर्ता निकोलस अल्मैदा ने निजी फायदे के लिए गरीबों के शोषण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने स्लमडॉग शब्द को गरीबों के लिए अपमानजनक बताया.इस तरह के प्रदर्शन देश के दूसरे भागों में भी हुआ. हिंदू जन जागृति समिति ने फिल्म में राम को दिखाने पर ऐतराज जताया.
बाल कलाकार
स्लमडॉग की सफलता के बाद फिल्मकार मालामाल हो गए. लागत से दस गुना से भी ज्यादा पैसा कमाया. लेकिन इस फिल्म के बाल कलाकार आज भी उसी स्लम में रहते हैं, जहां वे पहले रहते थे. जानकर आश्चर्य होता है कि फिल्म के इन बाल कलाकारों को महज कुछ रुपयों पर फिल्म में काम कराया गया. फिल्म में रूबीना अली(लतिका) और अहरुद्दीन इस्माइल(सलीम) को एक आम मजदूर से महज तीन गुनी मजदूरी दी गई. इस्माइल के घर को स्थानीय अधिकारियों ने गिरा दिया और वो अब प्लाटिक के टेंट में रहता है. इस्माइल टीबी से गस्त है. इस बात तो निर्देशक बॉयल ने भी माना और रूबीना-इस्माइल के लिए एक ट्रस्ट बनाने की बात भी कही, लेकिन ट्रस्ट में कितना पैसा दिया गया, किसी को नहीं मालूम.
कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे तब तुम मेरे पास आना प्रिय, मेरा दर खुला था खुला ही रहेगा, तुम्हारे लिए॥ होती नहीं शर्त कोई प्यार में मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया दिल में सितारे जो चमके जरा बुझाने लगी आरती का दिया खुद के नजर से ही गिरने लगो, अँधेरे में जब खुद के घिरने लगो तब तुम मेरे पास आना प्रिय ये दीपक जला था जला ही रहेगा, तुम्हारे लिए॥ अभी तुमको मेरी जरुरत नहीं, बहुत चाहने वाले मिल जायेंगे अभी रूप का एक सागर हो तुम, कँवल जितने चाहोगी दर्पण तुम्हें जब डराने लगे, जवानी भी दामन छुडाने लगे तब तुम मेरे पास आना प्रिय, मेरा सिर झुका है झुका ही रहेगा तुम्हारे लिए ॥