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रविवार, 14 अक्टूबर 2012

हिंदी कैसे बन सकती है सर्वश्रेष्ठ भाषा

() एक रविवारीय भोज के बाद, वार्तालाप में, भोजनोपरांत डकारते डकारते, मेरे एक पश्चिम-प्रशंसक, { भारत-निंदक, उन्हें स्वीकार ना होगा } वरिष्ठ मित्र नें प्रश्न उठाया, कि ”क्या, तुम्हारी हिंदी अंग्रेज़ी से टक्कर ले सकती है? सपने में भी नहीं।” यह सज्जन, हिंदी के प्रति, हीन भाव रखनेवालों में से है। वे, उन के ज्ञान की अपेक्षा, आयु के कारण ही, आदर पाते रहते है।
पर आंखे मूंद कर, ”साहेब वाक्यं प्रमाणं”, वाला उन का, यह पैंतरा और भारत के धर्म-भाषा-संस्कृति के प्रति हीन भावना-ग्रस्त-मानस मुझे रुचता नहीं। पर, ऐसी दुविधा में क्या करता? दुविधा इस लिए, कि यदि, उनकी आयु का आदर करूं, तो असत्य की, स्वीकृति समझी जाती है; और अपना अलग मत व्यक्त करूं, तो एक वरिष्ठ मित्र का अपमान माना जाता है। पर कुछ लोग स्वभाव से, आरोप को ही प्रमाण मान कर चलते हैं। यह सज्जन ¨ भी बहुत पढे होते हुए भी, उसी वर्ग में आते थे।
इस लिए, उस समय, उनका तर्क-हीन निर्णय और सर्वज्ञानी ठप्पामार पैंतरा देख, मुझे कुछ निराशा-सी हुयी। ऐसा नहीं, कि मेरे पास कुछ उत्तर नहीं था; पर इस लिए भी , कि हिंदी तो मेरे इस मित्र की भी भाषा थी, एक दृष्टि से मुझ से भी कुछ अधिक ही।पर उस समय उनका आक्रामक रूप, चुनौती भरा पैंतरा और ”सपने में भी नहीं” यह ब्रह्म वाक्य और आयु देख, उन्हें उत्तर देना मैं ने उचित नहीं माना। पर इस प्रसंग ने मेरी जिज्ञासा जगाई, अतः इस विषयपर कुछ पठन-पाठन-चिंतन-मनन इ. करता रहा।
() तो, क्या, हिंदी अंग्रेज़ीसे टक्कर ले सकती है?
निश्चित ले सकती है। और हिंदी भारतके लिए कई गुना लाभदायी ही नहीं, शीघ्र-उन्नतिकारक भी है। भारत की अपनी भाषा है। मैं इस विषयका हरेक बिंदु न्यूनतम शब्दों में क्रमवार आपके सामने रखूंगा। केवल तर्क ही दूंगा, भावना नहीं जगाउंगा। तर्क की भाषा सभी को स्वीकार करनी पडती है, पर केवल भावनाएं, आप को वयक्तिक जीवन में जो चाहो, करने की छूट देती है। और मैं चाहता हूं, कि सभी भारतीय हिंदी को अपनाएं; इसी लिए तर्क, केवल तर्क ही दूंगा।
()
आप निर्णय लें, मैं नहीं लूंगा। न्यूनतम समय लेकर मैं क्रमवार बिंदू आप के समक्ष रखता हूँ। इन बिंदुओं में भाउकता नहीं लाऊंगा। राष्ट्र भक्ति, भारतमाता, संस्कृति, इत्यादि शब्दों से परे, केवल तर्क के आधार पर प्रतिपादन करूंगा। तर्क ही, सर्व स्वीकृति के लिए उचित भी और आवश्यक भी है। इस लिए, केवल तर्क-तर्क-और तर्क ही दूंगा।
हिंदी और देवनागरी की वैज्ञानिकता”
()हर बिंदू पर गुणांक, आप अपने अनुमानके अनुसार, लगाने के लिए मुक्त हैं।
हमारी देवनागरी समस्त संसार की लिपियों में सबसे अधिक वैज्ञानिक है,सर्वोत्तम हैं। और, संसार के किसी भी कोने में प्रयुक्त वर्णमाला वैज्ञानिक रूप में विभाजित नहीं है, जैसी देवनागरी है। [गुणांक ५० अंग्रेज़ी २०]
() आप अपना नाम हिंदी में लिखिए। मैं ने ”मधुसूदन”(५ अक्षर) लिखा। अब अंग्रेज़ी-रोमन में लिखिए ”madhusudan” (१० अक्षर) अब, बताइए कि १० अक्षर लिखनेमें अधिक समय लगेगा, या ५ अक्षर लिखने में? ऐसे आप किसी भी शब्दके विषय में कह सकते हैं। गुणांक {हिंदी २०-अंग्रेज़ी १०}
() हिंदी में वर्तनी होती है, पर अंग्रेज़ी की भांति स्पेलिंग नहीं होती। लिपि चिह्नों के नाम और ध्वनि अभिन्न (समरूप) है।जो बोला जाता है, उसीको लिखा जाता है। क लिखो, और क ही पढो, गी लिखो और गी ही पढो।जो लिखा जाता है, वही बोला जाता है। ध्वनि और लिपि मे सामंजस्य है।
अंग्रेज़ी में ऐसा नहीं है। लिखते हैं S- T- A- T- I- O- N, और पढते हैं स्टेशन। उसका उच्चारण भी आपको किसीसे सुनना ही पडेगा। हमें तो देवनागरी का लाभ अंग्रेज़ी सीखते समय भी होता है, उच्चारण सीखने में भी, शब्द कोष के कोष्ठक मे देवनागरी में लिखा (स्टेशन) पढकर हम उच्चारण सीख गए। सोचो, कि केवल अंग्रेज़ी माध्यम में पढने वाला इसे कैसे सीखेगा? चीनी तो और चकरा जाएगा। देखा देवनागरी का प्रताप ! [हिंदी ५० अंग्रेज़ी २५]
() और, अंग्रेज़ी स्पेलिंग रटने में आप घंटे, बीता देंगे। इस एक ही, हिंदी के गुण के आधार पर हिंदी अतुलनीय हो जाती है। आज भी मुझे (एक प्रोफेसर को) अंग्रेज़ी शब्दों की स्पेलिंग डिक्षनरी खोल कर देखने में पर्याप्त समय व्यय करना पडता है।हिंदी शब्द उच्चारण ठीक सुनने पर, आप उसे लिख सकते हैं। कुछ वर्तनी का ध्यान देने पर आप सही सही लिख पाएंगे। {हिं 100 गुण -अं – १० )
हो सकता है, आपको 100 गुण अधिक लगे। पर आप के समय की बचत निश्चित कीमत रखती है। इससे भी अधिक, यह गतिमान, शीघ्रता का युग है। समय बचाने आप क्या नहीं करते? विमान, रेलगाडी, मोटर, बस सारा शीघ्रता के आधार पर चुना जाता है।
() हिंदी में, एक ध्वनिका एक ही संकेत है। अंग्रेज़ी में एक ही ध्वनि के लिए, अनेक संकेत काम में लिए जाते हैं। उदा. जैसे —-> क के लिए, k (king), c (cat), ck (cuckoo) इत्यादि.
एक संकेत से अनेक ध्वनियाँ भी व्यक्त की जाती है। उदा. जैसे—> a से () ()() () () इत्यादि। [हिंदी २५ अंग्रेज़ी १०]
() यही कारण था, कि, शालांत परीक्षा में हिंदी (मराठी) माध्यम से हम लोग शीघ्रता से परीक्षा के प्रश्न हल कर लेते थे। जब हमारे अंग्रेज़ी माध्यमों वाले मित्र विलंब से, उन्ही प्रश्नों को अंग्रेज़ी माध्यम से जैसे तैसे समय पूर्व पूरा करने में कठिनाई अनुभव करते थे। एक उदाहरण लेकर देखें। भूगोल का प्रश्न:
कोंकण में रेलमार्ग क्यों नहीं? {१२ अक्षर}और अंग्रेज़ी में होता था,
Why there are no railways in Konkan?{२९ अक्षर}
उसका उत्तर लिखने में भी उन्हें अधिक लिखना पडता था। अक्षर भी अधिक, गति पराई भाषा होने से धीमी, और अंग्रेज़ी में, सोचना भी धीमे ही, होता था। प्रश्न तो वही था, पर माध्यम अलग था।और फिर शायद उन्हें स्पेलिंग का भी ध्यान रखना पडता था। पर परीक्षार्थी का प्रभाव निश्चित घट जाता होगा। जो उत्तर एक पन्ने में हम देते थे, वे दो पन्ने लेते थे। (हिं २५-अं १०}
() हिंदी का लेखन संक्षेप में होता है।
उदा:एक बार मेरी, डिपार्टमेंट की बैठक में, युनिवर्सीटी के अध्यक्ष बिना पूर्व सूचना आए थे, जब हमारी सहायिका (सेक्रेटरी) छुट्टी पर थी। तो कनिष्ठ प्राध्यापक होने के नाते, मुझे उस के सविस्तार विवरण के लिए नियुक्त किया गया।इस बैठक मे, अध्यक्ष ने महत्व पूर्ण वचन दिए थे, जिस का विवरण आवश्यक था।
मैने कुछ सोच कर, देवनागरी मे, अंग्रेजी उच्चारों को लिखा, जो रोमन लिपिकी अपेक्षा, दो से ढाइ गुना शीघ्र था। जहां The के बदले ’द’ से काम चलता था, laboratory Expense के बदले लॅबोरॅटरी एक्सपेंस इस प्रकार लिख कर नोट्स तैय्यार किए, शब्दों के ऊपर की रेखा को भी तिलांजली दी। फिर घर जाकर, उसी को रोमन लिपि मे रूपांतरित कर के दुसरे दिन प्रस्तुत किया। विभाग के अन्य प्रोफेसरों के, अचरज का पार ना था। पूछा, क्या मà �ˆ शॉर्ट हॅंड जानता हूं? मैने उत्तर मे हिंदी- देव नागरी की जानकारी दी। उनके नाम लिख कर थोडी प्राथमिक जानकारी दी। उन्हें, हमारी नागरी लिपि कोई पहली बार समझा रहा था। अपेक्षा से कई अधिक, प्रभावित हुए। एक आयर्लॅण्ड से आया प्रॉफेसर लिपि के वलयांकित सुंदर(सविनय,मेरे अक्षर सुंदर है)अक्षरों को देख कर बोला ,यह तो सुपर-ह्यूमन लिपि है। {मन में सोचा, यह तो, अंग्रेज़ी में, इसे, देव(Divine) नागरी कह रहा à ��ै।} संसार भर में, इतनी वैज्ञानिक लिपि और कोई नहीं। सारे पी एच डी थे, पर उन्हें किसी ने हिंदी-नागरी लिपि के बारे में ठीक बताया नहीं था। हिंदी को उस के नाम से जानते थे, कुछ शब्द जैसे नमस्ते इत्यादि जानते थे। बंधुओ ! लगा, कि, हम जिस ढेर पर बैठे हैं, कचरे कूडे का नहीं पर हीरों का ढेर है। हृदय गद गद हुआ। हिंदी पर, गौरव प्रतीत हुआ। [हिंदी ५० अंग्रेज़ी २५]
() व्यक्ति सोचती भी शब्दों द्वारा है।जब आप सोचते हैं, मस्तिष्क में शब्द मालिका चलती है। लंबा शब्द अधिक समय लेता है, छोटा शब्द कम।
तो जब अंग्रेज़ी के शब्द ही लंबे हैं, तो उसमें सोचने की गति धीमी होनी ही है। अतिरिक्त, वह परायी भाषा होनेसे और भी धीमी। इसका अर्थ हुआ, कि अंग्रेज़ी में विचारों की गति हिंदी की अपेक्षा धीमी है। मेरी दृष्टि में हिंदी अंग्रेज़ी से दो गुना गतिमान है। [हिंदी ५० अंग्रेज़ी २५]
() लेखन की गति का भी वही निष्कर्ष। जो आशय आप ६ पन्नों में व्यक्त करेंगे। अंग्रेज़ी में व्यक्त करने में आपको १० पन्ने लगते हैं। गीता का एक २ पंक्ति का श्लोक पना भरकर अंग्रेज़ी में समझाना पडता है।[हिंदी ५० अंग्रेज़ी २५]
(१०) अर्थात, आप अंग्रेज़ी भाषा द्वारा शोध कर रहे हैं, तो जो काम ६ घंटों में हिंदी में कर सकते थे, उसे करने में आप को १० घंटे लग सकते हैं। अर्थ: आप शोध कार्य हिंदी में करेंगे, तो जीवन भर में ६७% से ७५% अधिक शोधकार्य कर सकते हैं। [हिं ५० अंग्रेज़ी २५]
(११) इस के अतिरिक्त हर छात्रको हिंदी माध्यम द्वारा, आज की शालेय शिक्षा अवधि में ही,(११-१२ वर्ष में) MSc की उपाधि मिल पाएगी। अर्थात आज तक जितने लोग केवल शाला पढकर निकले हैं, वे सारे M Sc से विभूषित होत।अंग्रेज़ी के कारण, यह ज्ञान भंडार दुर्लक्षित हो गया है।{ संदर्भ: बैसाखी पर दौडा दौडी, मुख्तार सिंह चौधरी} तो, क्या भारत आगे नहीं बढा होता? क्या भारत पीछडा होता ? भारत आज के अनुपातमें, कमसे कम, ३ स े ५ गुना आगे निकल गया होता?वैसे हम भारतीय बहुत बुद्धिमान है। यह जानकारी परदेश आकर पता चली। { हिंदी ५०० अंग्रेज़ी १००}
(१२) किसी को अंग्रेज़ी, रूसी, चीनी, अरबी, फारसी ही क्यों झूलू, स्वाहिली. हवाइयन —-संसार की कोई भी भाषा पढने से किस ने रोका है? प्रश्न:कल यदि रूस आगे बढा तो क्या तुरंत सभी को रूसी में शिक्षा देना प्रारंभ करेंगे? और परसों चीन आगे बढा तो? और फ्रांस?
वास्तव में पडोस के, चीन की भाषा पर्याप्त लोगों ने (सभी ने नहीं)सीखने की आवश्यकता है। उन की सीमा पर की कार्यवाही जानने के लिए। मेरी जानकारी के अनुसार आज कल यह जानकारी हमें अमरिका से प्राप्त होती है। या,फिर आक्रमण होने के बाद! [अनुमानसे लिखा है] अमरिका में सारी परदेशी भाषाएं गुप्त शत्रुओं की जान कारी प्राप्त करने के लिए पढी जाती हैं।
जो घोडा प्रति घंटा ५० मील की गति से दौडता है, वह क्या २० मील प्रति घंटा दौडनेवाले घोडेसे अधिक लाभदायी नहीं है?
पर भारतीय कस्तुरी मृग(हिरन) दौड रहा है, सुगंध का स्रोत ढूंढने। कोई तो उसे कहो, कहां भटक रहे हो, मेरे हिरना!तेरे पास ही, सुगंध-राशी है।
मुझे यह विश्वास नहीं होता, कि ऐसी कॉमन सेन्स वाली जानकारी जो इस लेखमें लिखी गयी है, हमारे नेतृत्व को नहीं थी? क्या किसी ने ऐसा सीधा सरल अध्ययन नहीं किया?
अब भी देर भले हुयी है। शीघ्रता से चरण बढाने चाहिए।
तो,क्या हिंदी अंग्रेज़ी से टक्कर ले सकती है? आप बुद्धिमान हैं। आप ही निर्णय करें।



रविवार, 11 मार्च 2012

एक युक्ति जो बदल देगी आपके ब्लॉगिंग का नक्शा


अगर आप अपने ब्लॉग को खूबसूतरत, आकर्षक, मनोहारी, सुरम्य देखना चाहते हैं, तो हमारे पास एक ऐसी युक्ति है। जिसे आप अपने ब्लॉगिंग को खूबसूरत और बेहद खूबसूरत बना सकते हैं।
जैसा कि हमने अपने ब्लॉग के लिए किया है।
कंप्यूटर पर हिंदी लेखन में एकरसता की प्रमुख वजह फॉंट है। फॉट यानी वर्ण का शिल्प यानी डिजाइन। कुछ साल पहले तक कंप्यूटर हिंदी लिखना आसान काम नहीं था। फॉटों की विविधता के चलते, उसे दूसरे कंप्यूटर पर पढ़ना और भी दुरूह कार्य था, मगर यूनिकोड के आविष्कार से कंप्यूटर पर हिंदी लेखन और पठन-पाठन आसान हो गया। मगर, हिंदी ब्लॉगों और वेबसाइटों पर हिंदी का एक ही फॉट दिखता है वो है यूनिकोड मंगल या ताहोमा(ब्लॉगों में)। आप किसी भी ब्लॉग या साइट पर जाइये आपको टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में हिंदी लिखी मिलेगी। कंप्यूटर पर हिंदी लेखन में शिल्प यानी डिजाइन का बेहद अभाव है। हिंदी अखबारों में आप सुंदर और मनोहारी फॉंट देख सकते हैं। सवाल उठता है कि ब्लॉगों और वेबसाइटों में इतने सुंदर फॉंट देखने को क्यों नहीं मिलते हैं।
दरअसल, हिंदी के अखबारों की शिल्पकारी यानी डिजाइनिंग बेहद महंगे सॉफ्टवेयरों यानी मृदुवसनों पर की जाती है, जो हिंदी वेबसाइटों और ब्लॉगों के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं अगर होते भी है तो उनके फॉट यूनिकोडित नहीं होते हैं, अत: लिख भी दिए जाएं तो उन्हें पढ़ने में दिक्कतें आएंगी।
तो कंप्यूटर पर हिंदी को सुंदर कैसे देखें। यह समस्या हिंदी ब्लॉगिंग जगत में लगातार बरकरार है। मैं भी इस समस्या से जूझ रहा था। कोशिश थी कि हिंदी के टेढ़े-मेढ़े और बेढंगे फॉट- ताहोमा(ब्लॉग में प्रयुक्त) और यूनिकोड मंग(हिंदी वेबसाइटों में प्रयुक्त फॉंट) की दुनिया से बाहर निकला जाए। काफी कोशिशें कीं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई कोशिशें कभी बेकार नहीं जातीं। यही वजह थी कि मेरी कोशिशें भी बेकार नहीं गई।
अन्वेषण के दौरान मुझे कई सुंदर, सुघड़, मनोहारी और आकर्षक यूनिकोडित फॉंट मिले। उदाहरण के तौर पर- सिद्धांता, कोकिला, अपराजिता, डीवीटीटी योगेश, संस्कृत-2003 के नाम गिनाए जा सकते हैं। इन फॉंटों को मैंने अपने कंप्यूटर पर इंस्टॉल कर लिया। इंस्टॉल करने के बावजूद मैं इन फॉटों में अपना ब्लॉग नहीं लिख पाता था। हां, ऑपन ऑफिस में लिखकर इसे अपने ब्लॉग पोस्ट में चिपका लेता था। मगर, इसके साथ भी समस्या थी। कभी-कभी ब्लॉग पर इस फॉट में लिखे गए शब्द चिपकते नहीं थे। वही पुराना ताहोमा फॉट दिखने लगता था।
एक बात और, चाहकर भी ब्लॉग पोस्ट का हेडर और डेट-हेडर का फॉंट नहीं बदल पाता था। ब्लॉग का हेडर, सब-हेडर, विगेट्स, टैब, फुटर के फॉट भी नहीं बदल पाता था।

अचानक दिमाग में एक युक्ति सूझी। मैंने अपने ब्लॉग के एचटीएमएल कोड में थोड़ी फेरबदल का फैसला किया।(साफ-साफ बता दूं कि मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है, साथ हीं मुझे सॉफ्टवेयर यानी मृदुवसन का भी कोई ग्यान नहीं है) इसके बावजूद मैंने इस दिशा में कोशिश करने का फैसला किया और अपने प्रयास में सफल रहा।
थोड़ी-सी फेरबदल ने मेरे ब्लॉग का नक्शा बदल दिया। मैं अपने ब्लॉग के ब्लॉग पोस्ट का हेडर और डेट-हेडर, ब्लॉग का हेडर, सब-हेडर, विगेट्स, टैब, फुटर के फॉटों को बदलने में कामयाब रहा।
अगर आप भी अपने ब्लॉग का नक्शा बदलना चाहते हैं तो तैयार हो जाइए-
  • सबसे पहले आपको अपने ब्लॉग का बैक-अप लेना चाहिए। ऐसा करने के लिए आप पहले ब्लॉग में लॉग-इन कर लें। फिर डैश-बोर्ड में जाकर, डिजाइन विकल्प चुने। और फिर एडिट एचटीएमल विकल्प पर क्लिक करें। पूरे एचटीएमएल कोड को कॉपी कर नोट पैड में चिपका लें। फिर उसे डेस्क टॉप पर सेव कर लें।
  • अब एचटीएमएल कोड बॉक्स के स्क्रॉल को नीचे सरकाइये। आपको Group description="Page" selector="body" मिलेगा। इसके नीचे ध्यान से देखिए। 20px Arial, Tahoma, नजर आएगा। यहां Tahoma को अपने पसंसदा फॉट (Siddhanta, Aparajita, Kokila इनमें से कोई एक) से बदल लीजिए। ये फॉट मुफ्त हैं और इन्हें से डाऊनलोड और इंस्टॉल किया जा सकता है।
  • इसी लाइन में एक और Tahoma मिलेगा उसे भी, पहले बदले गए फॉट में बदलिए।
  • स्कॉल नीचे सरकाइये। आगे आपकोGroup description="Blog Title" selector=".header h1"मिलेगा। इसके नीचे के एचटीएमएल वाक्य में Tahoma को अपने पसंदीदा यूनिकोड फॉंट (Siddhanta, Aparajita, Kokila इनमें से कोई एक) से बदल लीजिए।
  • आगे स्क्रॉल करने पर आपको Group description="Blog Description" selector=".header .description" मिलेगा.. इसके आगे के Tahoma को बदलिए।
  • फिर Group description="Tabs Text" selector=".tabs-inner .widget li a" नीचे के Tahoma को।
  • फिर Group description="Date Header" selector=".main-inner .widget h2.date-header, .main-inner .widget h2.date-header span" नीचे के ताहोमा को।
  • फिर Group description="Post Title" selector="h3.post-title, h4, h3.post-title a"ताहोमा को।
  • फिर Group description="Gadget Title" selector="h2" नीचे के ताहोमा को।
  • फिर Group description="Gadget Text" selector=".sidebar .widget"नीचे के ताहोमा को।
काम पूरा होते ही आप SAVE TEMPLATE को सेव कर लें। और अपने ब्लॉग के बदले हुए नक्शे को देखे। बहुत की खूबसूरत, मनोरम, आकर्षक दिखेगा आपका ब्लॉग।

अगर आप इस बदलाव से खुश नहीं हैं तो आपने डेस्कटॉप पर नोट पैड में जो एचटीएमएल कोड का बैक-अप ले रखा है। उसे एचटीएमएल कोड के बॉक्स में चिपकाकर SAVE TEMPLATE कर लें और आपका पुराना ब्लॉग स्वरूप आ जाएगा।

प्रयोग के परिणाम को जरूर बताएं और ब्लॉगिंग की दुनिया को खूबसूरत बनाए।

शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

कंप्यूटर पर हिंदी में टाइपिंग हुई और भी आसान



 
कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग अब ज्यादा मुश्किल नहीं रह गई है। लेकिन अब कई लोग कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग के बारे में पूछते हैं।
यहां हम ऐसा मानकर चल रहे हैं कि कंप्यूटर पर ज्यादातर लोग विंडो का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि मैं उबंटू का इस्तेमाल कर रहा हूं।
जो लोग विंडो विस्टा या विंडो-7 का इस्तेमाल कर रहे हैं वो--- स्टार्ट-- सैटिंग-- कंट्रोल पैनल--- रिजनल एंड लैंग्वेज में जाकर हिंदी भाषा चुन लें और एप्लाइ एंड ओके क्लिक कर लीजिए। बस इतना करना है।
जो लोग विंडो एक्सपी या इस्तेमाल कर रहे हैं उनके लिए हिंदी में टाइपिंग के लिए नीचे की विधियों में कोई एक चुन लें।
हां, याद रखे सैंटिग पूरी होने के बाद.. इंगलिश से हिंदी और हिंदी से इंगलिश बदलने के लिए अल्ट+शिफ्ट का इस्तेमाल करना पड़ता है।


1.
अगर आप कंप्यूटर में हिंदी टाइपिंग करना चाहते हैं तो आपको ज्यादा मेहनत करने की करने की जरूरत नहीं है, बस यहां से हिंदी टूलकिट डाऊनलोड कर लीजिए और इसे कंप्यूटर पर इंस्टॉल कर दीजिए और इस पेज पर बताए गए तरीकों से कुछ कंप्यूटर पर सैटिंग कर लें।
हिंदी टूलकिट डाऊनलोड करने के बाद आपको एक्सपी सीडी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बस सैटिंग करने के बाद हिंदी में लिखना हो तो अल्ट+शिफ्ट दबाइये
और फिर हिंदी लिखना हो तो अल्ट+शिफ्ट दबाइये।
2.
अगर आपके पास एक्सपी सीडी है और आप उसकी सहायता से कंप्यूटर पर सैटिंग करना चाहते हैं। तो इस पृष्ठ पर दिए गए नियमों की सहायता ले सकते हैं।
3.
कंप्यूटर पर टाइप करना नहीं आती है तो पांच मिनट में ये काम भी आप सीख सकते हैं।
हमारे इस पेज पर जाइये और पांच मिनट में टाइपिंग सीख जाइये।
कंप्यूटर पर हिंदी से जुड़ी समस्याओं के समाधान से लिए यहां क्लिक करें।



रविवार, 18 दिसंबर 2011

पांच मिनटोंमें सीखो कम्प्यूटर पर हिंदी लिखना


नोट- ये लेख लीना जी द्वारा विरचित है। जो leena.mehendale@gmail.com से प्राप्त हुआ है। अंत में मैंने एक छोटी जानकारी मात्र दी है।
बच्चों, अब तो स्कूलोंमें संगणक (कम्प्यूटर) सिखाया जाने लगा और तुममेंसे
कईयोंके घर में भी होगा। तो क्या तुम जानते हो कि संगणक पर हिंदी सीखने
के लिये एक युक्ति है जिसमें केवल आधा घंटा पर्याप्त है। वह भी अंग्रेजी
टंकन-ज्ञान पर निर्भरता के बिना। और अगर पूरी बात कहूँ तो हरेक भारतीय
भाषा सीखनेकी यही युक्ति है।

इस युक्तिका नाम है इनस्क्रिप्ट की-लेआउट अर्थात् संगणकके की-बोर्ड या
कुंजीपटलपर चलनेवाला एक विशिष्ट वर्णक्रम। लेकिन इसे सीखनेसे पहले
तुम्हें बस एक बार अपने संगणककी परीक्षा लेनी है और अगर वह खरा उतरा तो
तुम यह युक्ति सीख सकते हो।
तो पहले संगणककी परीक्षा इस प्रकार -- Go to start -> setting -> control
panel -> Regional and Language -> click
एक खिडकी खुलेगी जिसके ड्रॉप-डाउन मेन्यू पर लिखा होगा - ENG. मेन्यूमें
संसारकी बीसियों भाषाएँ मिलेंगी, और यदि हिंदी भी मिल जाय तो समझो
तुम्हारा संगणक परीक्षा पास हो गया। अब हिंदीको क्लिक करो और अप्लाय तथा
ओके के बटन भी दबाओ।। ऐसा करते ही संगणकके सबसे नीचेवाली पट्टीपर (टास्क-
बार पर) EN दीखने लगेगा और क्लिक करनेपर हिंदी का ऑप्शन भी मिलेगा।
यह काम केवल सबसे पहली बार करना है -- बारबार नही।
अब पहले वर्ड फाईल खोलकर फिर हिन्दी का ऑप्शन ले आओ और कोई भी कुंजी दबाओ
तो हिंदी अक्षर मिलेंगे।
तो अब तुम्हारा संगणक पास हो गया और तुम इनस्क्रिप्ट विधीसे हिंदी सीखना
आरंभ कर सकते हो।

अब कोई चित्र देखो जिसमें इनस्क्रिप्ट ले-आऊट बताया गया है।
इस लेआऊटमें वर्णोंका क्रम वैसे ही चलता है जैसा हमने कक्षा एकमें पढा
होता है -- अर्थात् कखगघ..., चछजझ..., या अआइईउऊ... । अतः कुंजियाँ
खोजनेकी दिक्कत नही है, जो अंग्रेजी सीखनेमें है । साथही इसमें तमाम
व्यंजन दायें और स्वरकी मात्राएँ बाँये हाथसे लगानेका चलन है, जिससे
अपनेआप एक लयसी बँध जाती है और थोडीही प्रॅक्टिसमें टंकनका काम तुम शीघ्र
गतिसे कर सकते हो।

अब चिन्ता छोडो की तुम्हारे कुंजीपटलपर हिंदी स्टिकर तो लगे ही नही हैं
-- बस निश्चिंत होकर चित्र देखो, अपना कुंजीपटल देखो और सीखो यह युक्ति।

पहले दो मिनटोंमें सीखो बीस अक्षर
कख-गघ --- सामान्य कुंजीपटलके अंग्रेजी अक्षर K-I की जोडी देखो। यही कख
और गघ हैं।
तथ- दध --- अगली दो कुंजियाँ L-O हैं जो तथ, दध के लिये हैं,
चछ- जझ --- अगली चछ,जझ की
टठ -डढ --- और उससे अगली टठ डढ की।
र ह --- क के बाँई ओर JU की कुंजीसे र-ह लिखते हैं और
पफ -बभ ---उससे बायें H-Y पर पफ, बभ हैं।
कुंजियोंकी ये जगहें समझकर आत्मसात् करनेको दो मिनट पर्याप्त हैं।
कठिन (भारी) अक्षरके लिये (अर्थात् खघ,थध,छझ,ठढ,फभ) शिफ्टके साथ कुंजी
दबानी होगी।

अगले दो मिनटोंमें सीखो और बीस अक्षर

बाँईं ओर की पाँच कुंजी-जोडियों बाराखडी के दस स्वरोंके लिये हैं। इन्हे
भी हमने पहली कक्षामें रटा था -- अआइईउऊएऐओऔअंअः

अ आ – अंग्रेजी अक्षर DE की जोडी
इ ई – FR की जोडी
उ ऊ – GT की जोडी
ए ऐ – SW की जोडी
ओ औ – AQ की जोडी
इनका क्रम ओऔ,एऐ,अआ,इई,उऊ रखा गया है क्योंकि इसमे सुविधा है। यहाँ
अंग्रेजी अक्षर मैंने केवल पहली बार जगह बताने के लिये लिखे हैं, याद
करने के लिये नही।
शिफ्टकुंजी के साथ लिखनेपर स्वतः स्वर लिखा जाता है परन्तु किसी व्यंजनकी
मात्रा लगाने के लिये शिफ्ट कुंजी नही लगेगी।
इस प्रकार दस मात्राएँ तथा उन्हें लगाने का तरीका समझने के लिये अगले दो
मिनट पर्याप्त हैं।

इन कुंजियोंको समझकर यदि हम प्रॅक्टिस करें --
काकी, चाची, दादी, ताई, ताऊ, बाबा, पापा, काका, चाचा, टाटा, दीदी -- तो
इस कुंजी रचना की सरलता तत्काल मोह लेती है।

बचे अक्षरोंको एक बार ढूँढ कर समझ जा सकता है।
शिफ्टके साथ ५,६,७,८, अंकोंकी कुंजियोंसे ज्ञ त्र क्ष श्र तथा + की
कुंजीसे ऋ लिखते हैं।
सबसे निचली पंक्ति में तिसरी कुंजीसे आरंभ कर म (शिफ्ट के साथ ण), न, व,
ल (शिफ्ट के साथ मराठी, कन्नड आदि भाषाओंका ळ), स (शिफ्ट के साथ श), ष
तथा अन्तिम कुंजीपर य (शिफ्ट के साथ बंगालीका दूसरा य) हैं।
ड से अगली कुंजी पर ञ है। शिफ्ट के साथ ह की कुंजीसे ङ लिखते हैं।
अनुस्वार के लिये अक्षर लिखने के बाद अंग्रेजी X की कुंजी लगाना। इसे
शिफ्ट के साथ लगानेपर चंद्रबिंदु लगता है।
जरासे अभ्यास से ये याद हो जाते हैं।

संयुक्त अक्षर
संस्कृत के नियमानुसार व्यंजन में अ लगाकर उसे पूरा किया जाता है। जब कि
यहाँ किसी भी कुंजीसे पूर्ण व्यंजन लिखा जाता है ताकि अ की मात्रा बारबार
न लगानी पडे। अतः इस कुंजीपटलमें अ की कुंजी (Dअक्षर पर) लगानेपर वहाँ
हलन्त लगता है और अगला व्यंजन उसमें जुड जाता है।
यदि लिखना हो क्रम तो क , हलन्त ,र ,म
परंतु कर्म लिखने के लिये क, र , हलन्त , म लिखा जायगा।
कृपा लिखनेके लिये क में ऋ की मात्रा (बिना शिप्ट के) और विसर्ग चिह्न के
लिये शिफ्टके साथ - की कुंजी लगती है।
संगणक के सामने बैठकर लिखने लगो तो यह सब पढनेमें जितना समय लगता है उससे
आधे समय में ही यह सब सीखा जाता है।

यदि संगणक ही परीक्षा में फेल गया तो तुम्हें उसकी मदद करनी पडेगी।
Regional and Language के मेन्यू में हिंदी न मिले तो उसे विण्डोजकी सीडी
से लोड करना पडेगा। विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम की सीडी में एक i386 फाईल
होती है जिससे ये हिंदी फॉण्ट संगणककी समझ में आते हैं। यह फाइल विण्डोज
की सीडी पर रखी होती है, लेकिन हर संगणक पर बाय डिफाल्ट लोड नही होती ।
इसीलिये तुम्हें अलगसे डालनी पडेगी। यदि तुम्हारे पास सीडी न हो तो किसी
दोस्तकी सीडीसे i386 फाईल को पेनड्राइव्ह पर ले आओ और उससे लोड करो।
तो बस सीखो हिंदी फटाफट और भेजो मुझे हिंदी ईमेल मेरा पता है --
leena.mehendale@gmail.com
यदि संभव हो तो इनस्क्रिप्ट सीखने का एक विडियो भी देखो जो मैंने अपनी
यूट्यूब sanskrittv पर रखा है।

संपूर्ण विधि को वीडियो में देखने लिए इस लिंक को चटकाएं
विशेष नोट- हां, अगर संगणक(कंप्यूटर) परीक्षा में असफल हो गया हो तो एक और युक्ति से उसमें हिंदी सक्षम किया जा सकता है।
बस अपने संगणक में हिंदी टूलकिट इंस्टॉल कर लीजिए और इस लेख में बताए गए नियम के अनुसार कंट्रोल पैनल में जाकर हिंदी भाषा विकल्प सेट कर लीजिए।
इस कड़ी में सब कुछ विस्तार से बताया गया है और यहां से हिंदी टूलकिट डाऊनलोड किया जा सकता है।--
यहां से--

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

हिन्दी का ताबूत



हिन्दी के ताबूत में हिन्दी के ही लोगों ने हिन्दी के ही नाम पर अब तक की सबसे बड़ी सरकारी कील ठोंक दी है। हिन्दी पखवाड़े के अंत में, 26 सितंबर 2011 को तत्कालीन राजभाषा सचिव वीणा ने अपनी सेवानिवृत्ति से चार दिन पहले एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी कर के हिन्दी की हत्या की मुहिम की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह हिन्दी को सहज और सुगम बनाने के नाम पर किया गया है। परिपत्र कहता है कि सरकारी कामकाज की हिन्दी बहुत कठिन और दुरूह हो गई है। इसलिए उसमें अंग्रेजी के प्रचलित और लोकप्रिय शब्दों को डाल कर सरल करना बहुत जरूरी है। इस महान फैसले के समर्थन में वीणा जी ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केन्द्रीय हिन्दी समिति से लेकर गृहराज्य मंत्री की मंत्रालयी बैठकों और राजभाषा विभाग द्वारा समय समय पर जारी निर्देशों का सहारा लिया है। यह परिपत्र केन्द्र सरकार के सारे कार्यालयों, निगमों को भेजा गया है इसे अमल में लाने के लिए। यानी कुछ दिनों में हम सरकारी दफ्तरों, कामकाज, पत्राचार की भाषा में इसका प्रभाव देखना शुरु कर देंगे। शायद केन्द्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के उनके सहायकों और राजभाषा अधिकारियों द्वारा लिखे जाने वाले सरकारी भाषणों में भी हमें यह नई सहज, सरल हिन्दी सुनाई पड़ने लगेगी। फिर यह पाठ्यपुस्तकों में, दूसरी पुस्तकों में, अखबारों, पत्रिकाओं में और कुछ साहित्यिक रचनाओं में भी दिखने लगेगी।


सारे अंग्रेजी अखबारों ने इस हिन्दी को हिन्ग्लिश कहा है। वीणा उपाध्याय के पत्र में इस शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। उसमें इसे हिन्दी को सुबोध और सुगम बनाना कहा गया है। अंग्रेजी और कई हिन्दी अखबारों ने इस ऐतिहासिक पहल का बड़ा स्वागत किया है। इसे शुद्ध, संस्कृतनिष्ठ, कठिन शब्दों की कैद से हिन्दी की मुक्ति कहा है। तो कैसी है यह नई आजाद सरकारी हिन्दी ? यह ऐसी हिन्दी है जिसमें छात्र, विद्यार्थी, प्रधानाचार्य, विद्यालय, विश्वविद्यालय, यंत्र, अनुच्छेद, मध्यान्ह भोजन, व्यंजन, भंडार, प्रकल्प, चेतना, नियमित, परिसर, छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा जैसे शब्द सरकारी कामकाज की हिन्दी से बाहर कर दिए गए हैं क्योंकि ये राजभाषा विभाग को कठिन और अगम लगते हैं। यह केवल उदाहरण है। परिपत्र में हिन्दी और भारतीय भाषाओं में प्रचलित हो गए अंग्रेजी, अरबी, फारसी और तुर्की शब्दों की बाकायदा सूची दी गई है जैसे टिकट, सिग्नल, स्टेशन, रेल, अदालत, कानून, फौज वगैरह।


परिपत्र ने अपनी नई समझ के आधार के रूप में किन्ही अनाम हिन्दी पत्रिकाओं में आज कल प्रचलित हिन्दी व्यवहार के कई नमूने भी उद्धृत किए हैं। उन्हें कहा है - हिंदी भाषा की आधुनिक शैली के कुछ उदाहरण। इनमें शामिल हैं प्रोजेक्ट, अवेयरनेस, कैम्पस, एरिया, कालेज, रेगुलर, स्टूडेन्ट, प्रोफेशनल सिंगिंग, इंटरनेशनल बिजनेस, स्ट्रीम, कोर्स, एप्लाई, हायर एजूकेशन, प्रतिभाशाली भारतीय स्टूडेन्ट्स वगैरह। तो ये हैं नई सरकारी हिन्दी की आदर्श आधुनिक शैली।


परिपत्र अपनी वैचारिक भूमिका भी साफ करता है। वह कहता है कि “किसी भी भाषा के दो रूप होते हैं – साहित्यिक और कामकाज की भाषा। कामकाज की भाषा में साहित्यिक शब्दों के इस्तेमाल से उस भाषा की ओर आम आदमी का रुझान कम हो जाता है और उसके प्रति मानसिक विरोध बढ़ता है। इसलिए हिन्दी की शालीनता और मर्यादा को सुरक्षित रखते हुए उसे सुबोध और सुगम बनाना आज के समय की माँग है।“


हमारे कई हिन्दी प्रेमी मित्रों को इसमें वैश्वीकरण और अंग्रेजी की पोषक शक्तियों का एक सुविचारित षडयंत्र दिखता है। कई पश्चिमी विद्वानों ने वैश्वीकरण के नाम पर अमेरिका के सांस्कृतिक नवउपनिवेशवाद को बढ़ाने वाली शक्तियों के उन षडयंत्रों के बारे में सविस्तार लिखा है जिसमें प्राचीन और समृद्ध समाजों से धीरे धीरे उनकी भाषाएँ छीन कर उसकी जगह अंग्रेजी को स्थापित किया जाता है। और यों उन समाजों को एक स्मृतिहीन, संस्कारहीन, सांस्कृतिक अनाथ और पराई संस्कृति पर आश्रित समाज बना कर अपना उपनिवेश बना लिया जाता है। अफ्रीकी देशों में यह व्यापक स्तर पर हो चुका है।


मुझे इसमें यह वैश्विक षडयंत्र नहीं सरकार और प्रशासन में बैठे लोगों का मानसिक दिवालियापन, निर्बुद्धिपन और भाषा की समझ और अपनी हिन्दी से लगाव दोनों का भयानक अभाव दिखता है। यह भी साफ दिखता है कि राजभाषा विभाग के मंत्री और शीर्षस्थ अधिकारी भी न तो देश की राजभाषा की अहमियत और व्यवहार की बारीकियाँ समझते हैं न ही भाषा जैसे बेहद गंभीर, जटिल और महत्वपूर्ण विषय की कोई गहरी और सटीक समझ उनमें है। भाषा और राजभाषा, साहित्यिक और कामकाजी भाषा के बीच एक नकली और मूर्खतापूर्ण विभाजन भी उन्होंने कर दिया है। अभी हम यह नहीं जानते कि किसके आदेश से, किन महान हिन्दी भाषाविदों और विद्वानों से चर्चा करके, किस वैचारिक प्रक्रिया के बाद यह परिपत्र जारी किया गया। अभी तो हम इतना ही जानते हैं कि इस सरकारी मूर्खता का तत्काल व्यापक विरोध करके इसे वापस कराया जाना जरूरी है। यह सारे हिन्दी जगत और देश की हर भाषा के समाज के लिए एक चुनौती है।


पुनश्च - यह एक संक्षिप्त, फौरी प्रतिक्रिया है। इसका विस्तार करूँगा जल्द।

सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

राजभाषा हिंदी को नष्ट करने का एक और सरकारी आदेश भाग-2

सरकार ने हिंदी को नष्ट करने की एक और चाल चल दी है। जी, हां, बात को घूमाने-फिर से कोई फायदा नहीं है। सरकार, हिंदी को सरल और जनप्रिय बनाने की आड़ में इस पर कुठाराघात कर दिया है। केंद्रीय हिंदी समिति ने अपनी तीसवीं बैठक में कथित तौर पर राजभाषा हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए जो प्रस्ताव दिए हैं वो प्रस्ताव हिंदी के लिए घातक है।
वो प्रस्ताव हिंदी को हिंदी से दूर ले जाने की एक जुटिल चाल है। ये चाल उन लोगों ने चली है। जिन्हें हिंदी से कोई लेना देना नहीं है। वो अपने अंग्रेजी ग्यान के आधार पर दूसरों को मुर्ख समझने की बार-बार भूल करते हैं।
केंद्रीय हिंदी समिति में ऐसे ऐसे लोगों हैं जो न सिर्फ अंग्रेजी में खाते और सोचते हैं बल्कि थूकते भी अंग्रेजी में ही हैं।
केंद्रीय हिंदी समिति के कर्ता-धर्ताओं की सूची देखिए, सबकुछ साफ हो जाएगा।
इन लोगों ने हिंदी के कल्याण(कल्याण यानी कल्याण) के लिए कुछ सोचा है। पता नहीं क्यों सोचा और किस हैसियत से सोचा। लेकिन इनकी सोच का नतीजा हिंदी की बर्बादी के प्रस्ताव के रूप में सामने आया है। ये प्रस्ताव अब सरकारी आदेश बन चुका है और जल्द ही देश भर में लागू होने वाला है।
इन लोगों को परियोजना, योजना, उद्देश्य, महत्व, जागरूकता, वृक्षारोपण, नियमित, परिसर, विश्वविद्यालय, जल संरक्षण जैसे शब्द कठिन लगते हैं। इसलिए इसकी जगह प्रोजेक्ट, मकसद, अहमियत, अवेयरनेस, रिफोस्टेशन, रेगुलर, कैंपस, कॉलेज, वाटर हार्वेस्टिंग जैसे शब्दों के प्रयोग के निर्देश दिए हैं।

हिंदी शब्दों को कठिन बताकर इनकी जगह अनुवाद में अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, अरबी, तुर्की के शब्दों को डालने के निर्देश हैं।
दरअसल, इन लोगों को पता नहीं है कि हिंदी के शब्द क्या हैं क्यों हैं,
जागरूकता की जगह अवेयरनेस लिखने से कितना भयंकर नुकसान होगा इसका अंदाजा शायद इन लोगों को नहीं है। दरअसल, निर्बुद्ध लोग ऊंचे-ऊंचे पद पा गए हैं वो अपना काम ठीक से कर नहीं पाते हैं और बात-बात में दूसरों के काम में टांग अड़ाते हैं। टांग की नहीं अड़ाते बल्कि अपनी सोच दूसरों पर थोपने से भी बात नहीं आते।
एक किरण से बदल गया जग
जागी दुनिया भोर हुआ।
जग जागा- जगना, जागना, जगाना, जागरूकता, जागरण, जगमग, जाग्रत, जागृति, जनजागरण, जनजागृति, जाग्रतावस्था का एक दूसरे से नाता है। अवेयरनेस का किससे नाता है।
कानून से गैर-कानून, कानूनी कानूनची, कानूनगो ही हो सकते हैं.. मगर विधि से विधान, संविधान, विधेयक, विधायक, संविधि, वैधानिक, अवैधानिक, असंवैधानिक, विधिवत, विधानसभा, विधिसम्मत, विधिपूर्वक, जैसे दर्जनों शब्द हैं। क्या एक शब्द को उठाकर, उसे कठिन बताकर खारिज किया जा सकता है।
नियम से नियमपूर्वक, नियमानुसार, नियमित, अधिनियमित, अधिनियम, नियामक, नियंता जैसे शब्दों को दुरूह बताया जा सकता है।
जिंदगी भर डिक्शनरी ढोने वाले लोगों को हिंदी का शब्दकोश पलटे बिना ही विद्वान होने का अहंकार हो जाता है और खुद को ग्यानी समझने का भान होने लगता है।
वो हिंदी के शब्दों को दुरुह बताने का दुष्चक्र रचने लगते हैं।

रविवार, 17 जुलाई 2011

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