हिंदी शोध संसार

गुरुवार, 18 मार्च 2010

मारिए पत्थर, पाइए ईनाम

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एक फिल्मी डॉयलॉग- स्साले, पुलिस वाले पर हाथ उठाते हो, मैं तुम्हारी जिंदगी बर्बाद करके रख दूंगा.

मैं नहीं चाहता कि कोई पुलिस वाला किसी अदना सी बात पर किसी की जिंदगी बर्बाद कर दे. अगर कोई पुलिस वाला अपनी वर्दी का नाजायज इस्तेमाल कर किसी की जिंदगी बर्बाद करता है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

लेकिन ऊपर आप जो चित्र देख रहे हैं उस चित्र ने कई पुलिस वालों की जिंदगी बर्बाद कर दी है. सारे अधिकारों को छीनकर सुरक्षा बलों के जवानों को बारोजगार पत्थरबाजों (क्योंकि पत्थर चलाना ही इनका रोजगार है) के बीच खड़ा कर दिया जाता है. इन पत्थरबाजों ने कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. ये पत्थरबाज लगातार सप्ताहों और महीनों तक पत्थरबाजी करने में माहिर होते हैं.

ये पत्थरबाज कही से आते हैं तो कही से लाए जाते हैं(भाड़े पर लाए जाने की खबर कई अखबारों में छपी है). इन पेशेवर पत्थरबाजों में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल होते हैं.

कुछ दिनों पहले की बात है पत्थरबाजों की इस भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े, सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई में इस तेरह साल के बच्चे की मौत हो गई(आंसू गैस के गोले लगने से)

सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई के लिए जवान को निलंबित कर दिया गया, उस मुकदमे की कार्रवाई हो रही है. 

लेकिन आज खबर आई है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन ने पत्थरबाजों के पुर्नवास और टूर पैकेज के लिए सरकार पत्र लिखा है. इस कार्यवाही से सरकार पत्थरबाजों का दिल जीतना चाहती है.

हाल ही में, पुलिस ने जम्मू में शांतिपूर्ण धरना दे रहे निर्दोष लोगों पर लाठियां बरसायी वहीं, दूसरी ओर घाटी में पत्थरबाजों पर सरकार मेहरबान है. यानी-

पत्थर मारो, ईनाम पाओ

दरअसल, ये केंद्र सरकार की हीलिंग टच नीति( वो पत्थर मारे और हम उन्हें तेल लगाकर सहलायें) है जिसने सुरक्षा बलों का नैतिक बल गिराने का काम किया है.

सरकार की तेल लगाकर सहलाओं नीति केवल कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादियों पर लागू होती है(पाक-अधिकृत कश्मीर के आतंकवादियों को क्षमादान और पुनर्वास) की नीति, बदले में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठी बरसाई जाती है.

सरकार संसद में अपनी मंशा साफ कर चुकी है कि चरमपंथी धर्म से अभिप्रेरित होते हैं. अपने देश में कार्यरत आतंकवादियों और चरमपंथियों को गृहमंत्री चिदंबरम ने दो हिस्सों में बांटा- जिहादी आतंकवादी(इस्लामी आतंकवादी कहने से परहेज किया, भाजपा द्वारा ऐतराज जताने पर कहा, वो भाजपा के लिए अपना विचार नहीं बदल सकते हैं) और हिंदू आतंकवाद.

माओवादी आतंकवादियों को उन्होंने हिंदू आतंकवादियों की श्रेणी में रखा और सरकार हिंदू आतंकवादियों को समाप्त करने के लिए ऑपरेशन ग्रीन हंट चला रही है. वहीं जेहादी आतंकवादियों(इस्लामी आतंकवादी नहीं करना चाहें तो मत कहें)  के लिए पुनर्वास और हीलिंग टच पॉलिसी है.

यानी पत्थर मारो ईनाम पाओ

कांग्रेस पिछले साठ सालों से कश्मीर में ये पॉलिसी अपना रही है, लेकिन कश्मीर का एक बच्चा भी कहने के लिए तैयार नहीं है कि वह भारत में रहना चाहता है. हम खरबों खर्च कर और कश्मीरी पंडितों को घाटी से खदेड़कर भी कश्मीरियों से भारत का नहीं कहवा सके.

3 टिप्‍पणियां :

  1. लेख के लिए धन्यवाद
    और १ बात कहना चाहूँगा की हिंदू कभी आतंकवादी नहीं बन सकता इसलिए नही की वो सहिष्णु है बल्कि इसलिए कि आज हिन्दुओ कि रगों में दोड़ने वाला खून दूषित हो गया है

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  2. क्या कश्मीर भारत का हिस्सा है?
    कमांडेंट जिसने गोली चलाने का आदेश दिया, गिरफ्तार है..
    कश्मीर की महिलायें यदि प्रदेश से बाहर शादी करेंगी तो उनकी नागरिकता खत्म हो जायेगी..

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  3. जब तक कठोरता नही लायी जायेगी तबतक आतंकवादी ऐसे काम करते रहेगे और भारतीय पुलिस शेर बनने के लिये आम जनो को परेशान करती रहेगी।

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