हिंदी शोध संसार

गुरुवार, 11 सितंबर 2008

विजय-सूत्र

मैं हाईस्कूल में पढ़ता था. स्कूल में तुलसी जयंती मनाई जा रही थी. मैंने भी भाषण और कविता पाठ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. कविता पाठ के लिए मैंने तुलसी रामायण की कुछ चौपाइयां उस वक्त याद की थी, वो आज भी मुझे बेहद अच्छे लगते हैं. इन चौपाइयों भगवान राम ने विभीषण को विजय के जो सूत्र बतलाए, वो इस प्रकार हैं-

रावण रथी विरथ रधुवीरा।
देख विभीषण भयहुं अधीरा।।
अधिक प्रीत मन भा संदेहा।
वंदि चरण कह सहित सनेहा।।
नाथ न रथ नहीं तन पद त्राणा।
केहिं विधि जीतव वीर बलवाना।।
सुनहुं सखा कह कृपा निधाना।
ज्यों जय होई स्यंदन आना।।
सौरज धीरज तेहिं रथ चाका।
बल विवेक दृढ़ ध्वजा पताका।।
सत्य शील दम परहित घोड़े।
क्षमा दया कृपा रजु जोड़े।
ईश भजन सारथी सुजाना।
संयम नियम शील मुख नाना।।
कवच अभेद्य विप्र गुरू पूजा।
यहि सम कोउ उपाय न दूजा।।
महा अजय संसार रिपु जीत सकहिं जो वीर।
जाके अस बल होहिं दृढ़ सुनहुं सखा मतिधीर।।

भावार्थ- राम-रावण युद्ध के मैदान में हैं. रावण रथ पर, राम भूमि पर. इसे देखकर विभीषण सशंकित हो उठा, बोला-प्रभू, आप रावण को कैसे जीत पाएंगे.
राम ने सस्नेह कहा, विभीषण जिस रथ(स्यंदन) पर विजय होगी, वो रथ मेरे पास है. धैर्य और शौर्य उस रथ के चक्के हैं. बल, विवेक और दृढ़ता उस रथ के ध्वजा-पताका हैं. सत्य, शील, दम और परोपकार उस रथ के घोड़े हैं. क्षमा, दया और कृपा उस रथ के लगाम हैं. प्रभु का भजन ज्ञानी सारथी है. संयम-नियम ये अनेक प्रकार से मददगार हैं. श्रेष्ठजन(विप्र) और गुरू की पूजा अभेद्य कवच है. इसके सिवाय विजय का कोई दूसरा रास्ता नहीं है.
विजय का यह रथ जिसके पास है. उसे संसार का कोई शत्रु नहीं जीत सकता है, चाहे वह कितना भी बलवान क्यों न हो.

4 टिप्‍पणियां :

  1. धन्यवाद रामायण की चोपाईयो के लिये, बहुत अच्छ लगा

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  2. अच्छा है। आशा है भविष्य में भी ऐसी अच्छी चीजें प्रस्तुत करते रहेंगे।
    कभी फुरसत में हों तो मेरे चिट्ठे पर भी पधारने का कष्ट करें।

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  3. जमाने बाद रामायण की चौपाइया पढ़ी । जिस वर्ष मैने मैट्रिक की परीक्षाएं दी थी , अपने परिवार की दो दादियों को रामायण पढ़कर सुनाया करती थी। लगभग पूरा रामायण सुनाया था , पर अभी कुछ भी याद नहीं। धन्यवाद।

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  4. जग में सुन्दर हैं दो नाम
    बोलो राम राम राम
    अच्छी प्रस्तुति
    धन्यवाद

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