हिंदी शोध संसार

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

नरेंद्र मोदी को एसआईटी दे सकती है क्लिन चिट

2002 के गुजरात दंगों के मामले में इस साल के सितंबर महीने में सुप्रीमकोर्ट से राहत मिलने पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा था-- ईश्वर बड़ा है। नरेंद्र मोदी ने इस खबर को एक राहत की तरह देखा था.. सचमुच में वह एक बड़ी राहत थी। और नरेंद्र मोदी को ठीक ही लगा था कि ईश्वर बड़ा है।

2002 के गुजरात दंगों की जांच के लिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा गठित एसआईटी इस साल के दिसंबर महीने में निचली कोर्ट में जो रिपोर्ट पेश करेगी, उसमें वो कोर्ट से इस मामले को बंद करने की रिपोर्ट देगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबरों के मुताबिक, एसआईटी कोर्ट में कहने वाली है कि गुलबर्ग नरसंहार के मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने अपनी शिकायत में जिन 63 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.. उनके खिलाफ एसआईटी को कोई सबूत नहीं मिले हैं।

एसआईटी अधिकारी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि रिपोर्ट पूरी तरह से तैयार हो चुकी है और अगर भविष्य में किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई सबूत पाए जाते हैं तो उसका नाम आरोप पत्र में शामिल किया जाएगा। साथ ही एसआईटी ने कहा कि कोर्ट के निर्देश के बगैर किसी की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।

अपनी शिकायरत में जाकिया जाफरी ने कहा कि थी नरेंद्र मोदी और 62 अन्य लोगों ने साबरमती ट्रेन अग्निकांड के बाद दंगा भड़कने दिया।

ऐसा माना जा रहा है कि एसआईटी प्रमुख रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए आज अहमदाबाद का दौरा करेंगे। निचली अदालत के समक्ष एसआईटी और अदालत मित्र(एमिकस क्यूरी) दोनों की रिपोर्ट रखी जाएगी और कोर्ट इस पर फैसला करेगा। एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन की रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी पर गोधरा दंगों के उत्तेजक भाषण देने के लिए शिकायत दर्ज करने की सिफारिश की गई है। वहीं इस रिपोर्ट में आईपीएस पीबी गोंडिया पर लापरवाही के आरोप में पूछताछ की सिफारिश की गई है। हालांकि एसआईटी की रिपोर्ट में इस तरह के तथ्यों के नहीं पाए जाने की बात कही गई है।

आपको बता दें कि 12 सितंबर को सुप्रीमकोर्ट ने नरेंद्र मोदी को इस मामले में राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट को एसआईटी और अमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला करने को कहा था.. इसके बाद नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा- ईश्वर महान है। और उन्होंने गुजरात में तीन दिनों का सदभावना उपवास करने की घोषणा की थी।

बुधवार, 9 नवंबर 2011

क्या अहंकारी हैं अरविंद केजरीवाल?-- हमें कुछ नहीं, बस जन लोकपाल चाहिए

रजत शर्मा की आपकी की अदालत में अरविंद केजरीवाल ने अपने और टीम अन्ना के ऊपर लगे सारे आरोपों का बेवाकी से जवाब दिया।

वीडियो लिंक यहां मौजूद है---- यहां


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सोमवार, 7 नवंबर 2011

यू-ट्यूब बॉक्स-ऑफिस पर फिल्म देखना वाकई शानदार अनुभव है


यू-ट्यूब पर अनायास ही, बॉक्स-ऑफिस पेज पर चला गया. जहां दर्शको के लिए चुनिंदा हिंदी फिल्में देखने के लिए उपलब्ध है। बिल्कुल थियेटर के स्टाइल वाले स्क्रीन पर ऑन-लाइन फिल्म देखना वाकई शानदार अनुभव रहा।

संगीत प्रेमियों के लिए अनमोल खजाना

गूगल क्रोम का इस्तेमाल(उबंटू पर क्रोम का मिलता-जुलता वर्जन-क्रोमियम इस्तेमाल कर रहा हूं- निश्चित तौर प गूगल क्रोम में भी ये चीज होगी) पर SAAVN नामक एक प्लग इन है.. जो एक तरह से नए पुराने गीतों का अनमोल खजाना है। जहां आप हजारों-हजार गाने ऑन-लाइन सुन सकते हैं।
सावन का लिंक






हां आप यहां अपना पसंदीदा गानों की सूची सहेज सकते हैं।


तो आजमाकर देखिए इस बेहतरीन और लघु प्लग-इन को

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

क्या हुआ हिंदू आतंकवाद का... संदर्भ- मालेगांव धमाके के आरोपियों की जमानत का एनआईए नहीं करेगी विरोध

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने एक अहम जानकारी दी है- जिससे हिंदू आतंकवाद के पैरोकारों को सदमा लगे और हिंदू आतंकवाद शब्द का विरोध कर रहे लोगों को थोड़ी शांति मिले। वो जानकारी ये है कि अब एनआईए यानी राष्ट्रीय अन्वेषण ब्यूरो(शायद, जिसका निर्माण सिर्फ और सिर्फ हिंदू आतंकवाद पर नकेल कसने की मकसद से हुआ था), अब मालेगांव धमाके के नौ आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध नहीं करेगी।
सवाल उठता है आखिर क्यों, क्या एनआईए थक गया है या यूपीए सरकार थक गई या हिंदू आतंकवाद का राग अलापने वाले कांग्रेसी नेता, चाहे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी हो या वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी या गृहमंत्री पी चिदंबरम थक गए हैं।
आखिर, एनआईए अब क्यों विरोध नहीं करेगी जमानत याचिका का।
आखिरकार, इन लोगों को तीन सालों तक जेल में रखने के बाद एनआईए अब क्यों पीछे हट रही है। कम से कम जांच पूरी होने तक और आरोप पत्र दाखिल होने तक इन लोगों को जेल में तो रखा ही जा सकता है। मगर, इन तीन सालों में मुंबई एटीएस और एनआईए ने क्या हासिल किया।
इसका सिर्फ एक और एक जवाब है- कुछ नहीं, सिफर, शून्य और कुछ नहीं।
आखिर मुंबई एटीएस और एनआईए इतनी निकम्मा है जो अपने आकाओं की एक हसरत पूरी नहीं कर सका।
गृहमंत्री की इस घोषणा के बाद, महाराष्ट्र एटीएस को बड़ी फजीहत और शर्मींदगी झेलनी पड़ेगी। इतना हीं, इस मामले ने उसकी जांच के तरीकों और बड़े बड़े दावों(अपने राजनीतिक आकाओं की शह पर ही सही) पोल खोलकर रख दी है।
जब चिदंबरम से पूछा गया कि क्या तीन सालों से जेल में बंद ये लोग निर्दोष हैं तो चिदंबरम ने कहा-- नहीं..
और तब तक नहीं, जब इस धमाके में शामिल किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में पता नहीं लगा लिया जाता और उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए जाते।
इतना ही, चिदंबरम ने यहां तक कहा कि जब पुराने आरोप पत्र का संशोधन नहीं हो जाता, तब तक वो किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते।
हालांकि चिदंबरम को अभी भी स्वामी असीमानंद के कथित स्वीकारोक्ति में हिंदूवादी आतंकवाद की संभावना दिख रही है।
ये सभी तक साफ नहीं हो पाया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण यानी एनआईए इन नौ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी या नहीं। आखिर इन पुलिस अधिकारियों ने किस आधार पर इन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।