हिंदी शोध संसार

शनिवार, 1 अगस्त 2009

एक और मुसलमान


एक और मुसलमान
इमरान हाशमी जिसे ने बॉलीवुड में सीरियल किस प्रतियोगिता में बार-बार बाजी मार कर बड़ी ख्याति हासिल की है. हाशमी के मामा महेश भट्ट को लोग डैडी, सारांश के लिए कम जिस्म, मर्डर के लिए ज्यादा जानते हैं. दरअसल, भारतीय सिनेमा जो अस्सी साल में नहीं कर पाई, इमरान हाशमी के बूते महेश भट्ट ने कुछ ही दिनों में कर दिया.
शबाना आजमी, जावेद अख्तर और आमीर खान के बाद देश में एक और मुसलमान प्रकट हुए हैं जिन्हें उनके होने की वजह से फ्लैट नहीं मिल रहा है.
सीरियल किसर नाम से मशहूर इमरान हाशमी को मुंबई के पाली हिल इलाके में घर इसलिए नहीं मिला क्योंकि वे मुसलमान हैं. ऐसा खुद इमरान हाशमी का कहना है. इससे पहले, मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी भी ऐसा कह चुकी है. टीवी सीरियल कलाकार आमीर खान भी इस तरह की बात कर चुके हैं.
इमरान हाशमी जिसे ने बॉलीवुड में सीरियल किस प्रतियोगिता में बार-बार बाजी मार कर बड़ी ख्याति हासिल की है. हाशमी के मामा महेश भट्ट को लोग डैडी, सारांश के लिए कम जिस्म, मर्डर के लिए ज्यादा जानते हैं. दरअसल, भारतीय सिनेमा जो अस्सी साल में नहीं कर पाई, इमरान हाशमी के बूते महेश भट्ट ने कुछ ही दिनों में कर दिया. तड़ातड़ चुंबन जड़कर और बदन उघाड़कर बॉलीवुड का ट्रेंड ही बदल दिया. इस बदलते ट्रेंड के दौरान किसी ने न हाशमी से और न ही महेश भट्ट से पूछा कि आप हिंदू हैं या मुसलमान. इस बदलाव अभियान के दौरान न हीं महेश भट्ट ने और न ही इमरान हाशमी ने खुद से पूछा कि वो हिंदू है या मुसलमान. आज जब इमरान हाशमी फ्लॉप हो चुका है तब उसे ख्याल आया कि वो मुसलमान है.
चाल, चलन और चरित्र से महेश भट्ट को लोग अच्छी तरह जानते हैं. बिन बुलाये जहां-तहां मुसलमान के हितों की पैरवी करते दिख जाते हैं. काफी परिपक्व हो चुके हैं इसलिए उपदेश देने में भी उन्होंने महारत हासिल कर ली है.
कुछ रोज पहले की बात है. बिजली विभाग के दफ्तर के आगे एक पैंतालिस-पचास साल का व्यक्ति ये कहकर अपना भड़ास निकाल रहा था कि वो मुसलमान है इसलिए बिजली बिल जमा करने के लिए उसे लाइन में लगने के लिए मजबूर किया जाता है.
इसी कहा जा सकता है कि रेल टिकट के लिये, बैंक में या और कहीं लोगों को इसलिए लाइन में लगना पड़ता है क्योंकि वे मुसलमान होते हैं.
हाल में, एक मीडिया चैनेल में न्यूज एडीटर के कैबिन में एक दाढ़ी वाले साहब आए, बोले, आप शबनम(बदला हुआ नाम) को नाइट शिफ्ट क्यों लगाते हैं. एडीटर साहब बोले, यहां तो सबकी नाइट लगती है.
दाढ़ी वाले साहब बोले, आप उस लड़की ज्यादा परेशान मत करिेए, मेरी पहुंच राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग तक है और वो धमकी देकर चले गए.
यहां मुसलमानों के लिए अल्पसंख्यक आयोग है. अल्पसंख्यक आयोग का घौंस जमाते हैं. इमरान और महेश भट्ट जैसे लोग. अल्पसंख्यकों के लिए उपदेश दिए फिरते हैं.
क्या ये कभी कश्मीरी पंडितों के लिए भी धरना प्रदर्शन किेए या कहीं भाषण दिेए हैं.
देश में दर्जनों मुस्लिम बहुत क्षेत्र हैं जहां हिंदुओं को एक इंच जमीन नहीं दिया जाता है.
ये चंद लोग फायदा उठाने के लिए संविधान का हवाला देते हैं. अल्पसंख्यक आयोग की दुहाई देते हैं लेकिन क्या ये देश के संविधान को मानते हैं.
इमरान हाशमी को कोई फ्लैट क्यों देगा. अपने पड़ोस में क्यों रहने देना चाहेगा. उसने अपनी छवि वैसी बना ली है जो न किसी सभ्यता को पसंद है और न किसी संस्कृति को. अपनी खराब छवि को लेकर धर्म-निरपेक्षता को बदनाम करना और धार्मिक भावना भड़काना ठीक नहीं है.
यहां की छद्म-धर्मनिरपेक्षता मीडिया इनके मुस्लिम कार्ड को टीआरपी के लिए खेलती है. महेश बाबू फ्री में उपलब्ध रहते हैं ऐसी मीडिया के लिए. ये मीडिया इस सांप्रदायिकता को चटकारे ले-लेकर कर चलाती है.
क्या अच्छे लोगों को साथ रहने का अधिकार नहीं है. छद्म-धर्मनिपेक्षता से डरकर क्यों इमरान जैसे गंदे लोगों को कोई अपनी सोसाइटी में जगह दे.
जिस सोसाइटी की बात इमरान कर रहा है. उस सोसाइटी में दिलीपकुमार जैसे लोग भी रहते हैं. क्या वे मुसलमान नहीं हैं.

3 टिप्‍पणियां :

  1. हैरत है, परवेज साहब की बात तो समझ में आई इमरान हाशमी जी के मामले में यकीन नहीं करसकते, बस इतना ही कहता हूं आगे तो उनका नाम लेने से मुझे बहुत कुछ याद आने लगा है, अल्लाह खेर करे इस खबर के बाद तो देश में चुपके चुपके कितने घर उन्हें मिल जायेंगे, यह गंदगी फैलाने का नया तरीका निकाला गया है,

    खैर इस ब्लाग में मन्त्र भी देखने को मिले मैं तो समझ नहीं सका, जो समझता हूं ऐसे कुछ मंत्र हम भी लिये बैठे हैं किसी का फुर्सत हो तो आजाये

    मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा .
    antimawtar.blogspot.com

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  2. अरब/पाकिस्तान/बांग्लादेश चले जायें इमरान हाशमी

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  3. रहीम ठीक कह गये हैं-

    महिमा घटी समुद्र की रावन बसा पड़ोस।

    अपना पड़ोसी एक संस्कारवान व्यक्ति हो, सभी का अधिकार है।

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