हिंदी शोध संसार

गुरुवार, 2 अक्तूबर 2008

सर रिचर्ड एटिनबरो की गांधी-1

पार्श्व में रघुपति राघव का संगीत चलता है.

किसी भी आदमी के जीवन की कहानी एक ही बार में पूरी तरह नहीं कही जा सकती. फिर तो गांधीजी की जीवनगाथा पूरे देश और उसकी आजादी का इतिहास है. उसके साथ जुड़ी हर महत्वपूर्ण घटना और व्यक्ति के साथ थोड़े से समय में पूरी तरह न्याय कर पाना संभव नहीं है. सभव है, तो यही, कि हम ईमानदारी से उनकी उनकी जीवनधारा के तत्व को दर्शा सकें, उनके मन और आत्मा तक खुद को पहुंचा सकें.


नई दिल्ली, 30 जनवरी, 1948

गांधीजी प्रार्थना सभा जा रहे थे. नाथूराम गोडसे सहित कई लोग गांधीजी की गतिविधियों पर नजर जमाए हुए थे(वे उनकी हत्या की ताक में थे.) मौका पाते ही नाथूराम पहले बापू के पैर छूकर प्रणाम करता है फिर उनपर गोली चला देता है. हे राम, के साथ बापू अंतिम सांस लेते हैं.

गांधीजी की हत्या कर दी जाती है, पूरा भारत बापू के लिए रो रहा है. उन्हें अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा है. देशी-विदेशी पत्रकार इस गमगीन वातावरण का वर्णन कर रहे हैं.

जिस महान संत को हमारी श्रद्धांजलि अर्पित है, सदा ही वो सादगी से जिया. अवतार से मानव. ना कोई घर-दर, न प्रपंच, न कोई पदवी थी, न कोई ओहदा था.

महात्मा गांधी किसी सेना के कमांडर नहीं थे, न ही किसी विशाल राज्य के शासक थे, न उनकी पहुंच विज्ञान के क्षेत्र में थी, न ही कला के क्षेत्र में ही, लेकिन तब भी, आज के दिन दुनियाभर के शासक और लोकनायक इस खद्दरधारी काले आदमी को, जिसने अपने देश को आजादी दिलाई, श्रद्धांजलि अर्पित करने आए हुए हैं. अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट, जनरल जी मार्शल ने कहा है, महात्मा गांधी आज सारी मानवता के प्रतिनिधि बन गए हैं.

ये वो व्यक्तित्व है जिसने सत्य को और विनम्रता को साम्राज्यों से भी ज्यादा शक्तिशाली बनाया.

महान वैज्ञानिक आइन्सटीन ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को ये मुश्किल से विश्वास होगा कि हाड़-मांस का ऐसा भी कोई मानव इस धरती पर जन्मा था.


दक्षिण अफ्रीका, 1893

गांधीजी एक हिंदुस्तानी के मुकदमे की पैरवी के लिए ट्रेन से दक्षिण अफ्रीका में सफर कर रहे थे. वो एक किताब पढ़ रहे थे.

उन्होंने वहां मौजूद परिचारक से पूछा, तुमने कभी स्वर्ग नरक के बार में सोचा है, नहीं न, ना ही मैंने, पर ये आदमी है न, जिसने ये किताब लिखी है, वो एक ईसाई है और वो कहता है अगर विश्वास करना है तो...

परिचारक- माफ करिेए सर, आप कितने दिनों से साउथ अफ्रीका में हैं.

महात्मा गांधी- ये ही कोई एक हफ्ते हुए.

परिचारक- आपको ये टिकट कैसे मिला.

तभी दो गोरे अधिकारी आते हैं, एक कहता है, तुम यहां क्या कर रहे हो इस जगह, कुली.

गांधीजी, क्यों, ये, ये टिकट है, फर्स्ट क्लास टिकट.

अधिकारी- ये कैसे हासिल हुआ तुम्हें.

गांधीजी, ये मैंने डाक से मंगवाया था, मैं एक वकील हूं और मेरे पास इतना समय नहीं था कि मैं खुद..

अधिकारी- यहां कोई काला वकील नहीं है साउथ अफ्रीका में, थर्ड क्लास में जाओ.

परिचारक- चलिए, ले चलता हूं आपका सामान.

गांधीजी, नहीं, नहीं, रुकिए जरा आप, ये देखिए मोहनदास के गांधी, एटॉर्नी एट लॉ.(अपना पहचान पत्र हाजिर करते हैं.) इस वक्त मैं प्रीटोरिया जा रहा हूं एक हिंदुस्तानी कंपनी के मुकदमे के लिए.

अधिकारी- सुना नहीं तुमने. यहां कोई काला वकील नहीं, ये साउथ अफ्रीका है.

गांधीजी-सर, मैंने वकालत पास की है, लंदन से और मेम्बर हूं हाईकोर्ट चांसेरी का और तभी वकालत कर रहा हूं, क्योंकि मैं आपकी नजर में काला आदमी हूं, इससे कम से कम ये तो जाहिर हुआ कि कम से एक काला आदमी तो है साउथ अफ्रीका में.

अधिकारी- बदजबान हब्शी. फेंक दो इसे.

सुरक्षा अधिकारी-ले जाओ अपना सामान थर्ड क्लास में, वर्ना फेंक दूंगा इस गाड़ी से.

गांधीजी- मैं हमेशा फर्स्ट क्लास.. और आप हमें..

(सुरक्षा अधिकारी गांधीजी को सामान सहित ट्रेन से बाहर फेंक देता है, गांधीजी चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते हैं.)


दृश्य-परिवर्तन

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गांधीजी अपने क्लाइंट, मिस्टर खान के पास पहुंच चुके थे.

उन्होंने उससे पूछा, यहां हर आदमी को तीसरे दर्जे में सफर करना पड़ता है.

मिस्टर खान- हम यहां हिंदुस्तानी हैं, इसलिए सफर करना हो तो हम तीसरे दर्जे में सफर करते हैं.

गांधीजी- पर हम इंग्लैंड में तो..

खान-जी वो इंग्लैंड था..

गांधीजी- लेकिन यहां भी इंग्लैंड की हुकूमत है.

खान के स्थानीय वकील-मिस्टर गांधी, गौर करिए मिस्टर खान एक मुस्लिम सौदागर हैं, पर साउथ अफ्रीकन इन्हें हिंदुस्तानी समझते हैं. ज्यादातर हिंदुस्तानी यहां जो हिंदू और मुसलमान हैं, उन्हें यहां खेतों और खदानों में काम कराने के लिए लाए जाते हैं. बस यूरोपियन नहीं चाहते हैं कि कोई दूसरा कुछ करें.

गांधी-पर ये तो सरसर अत्याचार है.

दूसरा वकील- मिस्टर गांधी, साउथ अफ्रीका में हिंदुस्तानियों को गोरों के साथ सड़क पर चलने की भी इजाजत नहीं है.

गांधी- मगर, मिस्टर खान, आप मिस्टर बेकर को वकील तो रख सकते हैं मगर उनके साथ सड़क पर चल नहीं सकते हैं.

मिस्टर खान-चल सकता हूं, मगर खतरा है कि कोई ठोकर लगाकर नाले में फेंक देगा, जो मिस्टर बेकर जैसा नेक नहीं हो.

गांधी(सचेत होकर)- लेख लिखूंगा अखबारों में, यहां के और इंग्लैंड के, और न्याय का सहारा लूंगा.

बेकन- तो फिर काफी गड़बड़ होगा. हमारी तादाद तो..

गांधी- हम सभी इसी राज्य की प्रजा हैं और हमारी सभ्यता कोई आजकल की नहीं है, फिर क्यों, ये सब बंदिशों सिर्फ हम पर हों.

मिस्टर खान- वैसे ये ख्याल काफी दिलचस्प है कि कोई हिंदुस्तानी बैरिस्टर है साउथ अफ्रीका में. मुझे यकीन है कि हमारे लोग आपको जरूर मुकदमे देंगे मिस्टर गांधी, चाहे आपको हर दिन झगड़ा करना पड़े और अगर हंगामा कुछ जोरदार हो तो और भी अच्छा है.


दृश्य परिवर्तन

दक्षिण अफ्रीका में हिंदुस्तानियों को अपने साथ पहचान पत्र रखना पड़ता है, जिसे मांगे जाने पर उन्हें दिखाना पड़ता है. गांधी जी ने हिंदुस्तानियों से इस पहचान पत्र को सार्वजनिक रूप से जलाने के लिए आगे आने को कहा. उनका मानना था कि ये पहचान पर भेदभाव बढ़ाने वाला है. लोगों को एक मैदान में इस पहचान पत्र को जलाने के लिए बुलाया गया. मैदान में बहुत कम लोग जुटे.

मिस्टर खान- तुमने तो कहा था कि हजारों लोग आएंगे, लेकिन थोड़े बहुत हिंदु हैं जो अपनी बीवीओं को साथ आए हैं.

गांधी- नहीं, उनको मेरी पत्नी ने इकट्ठा किया है(उनमें से कुछ जा रहे हैं.)

गांधी- बहनों और भाइयों, आपको यहां इसलिए बुलाया गया है. आप सब मिलकर ये मांग करें कि इस राज्य में हमें बराबर का हक मिले. कोई झगड़ा नहीं चाहते हैं हमलोग. विरोधी ताकत का हम सबको बहुत अच्छी तरह अंदाजा है. इसलिए हम उनके खिलाफ सही शांतिपूर्ण तरीके अपनाएं, पर ये निश्चित माने कि जीत पक्की है. हमारी सामाजिक हैसियत का सबूत है ये पास, जो हमेशा साथ रखना पड़ता है, पर ये बंदिश यूरोप के लोगों पर नही है. हुकुमत से अपना ये हक हासिल करने के लिए सबसे पहले ये भेदभाव मिटाना होगा(और गांधीजी पास को आग में डाल देते हैं. अंग्रेज सिपाहियों में खलबली मच जाती है.)

तभी मिस्टर खान कहते हैं- लिखते तो हो अच्छा, पर लोगों में जोश तो करो पैदा.

मिस्टर खान- हम नहीं चाहते हैं कि डर या नफरत की आग भड़काएं, पर ये इल्तजा है हिंदुओं से, मुस्लिमों से और सिखों से कि वो आगे आएं और हमारा साथ दें ताकि ब्रिटिश हुक्मरानों को अकल आए और हम सबके साथ वो इंसाफ करें. आइएं, वो पासेज हो हमें कमेटी से मिले थे, जला दें. आइए, आगे बढ़िए और अपने पासेज(पास को जलाने आगे बढ़ते है, अंग्रेज सिपाही दौड़ पड़ते हैं उन्हें गिरफ्तार कर लेती है.)

सिपाही-ये पासेज गवर्नमेंट की मिल्कियत हैं, जो इन्हें जलाएगा, मैं गिरफ्तार कर लूंगा उसको.

इसके बावजूद खान पास को जला देता है. इसके बाद गांधीजी सारे लोगों से पास इकट्ठा कर जलाने लगते हैं, सिपाही उनपर लाठियां बरसाने लगते हैं.. लेकिन वे तब तक पासेज को एक-एक कर जलाते है, जब तक वे लाठियों की मार से बेहोश नहीं हो जाते हैं. लेकिन वे सिपाहियों की हिंसा का विरोध नहीं करते हैं.


दृश्य परिवर्तन

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अंग्रेज अधिकारियों का दफ्तर

एक अंग्रेज अधिकारी- लंदन से अखबार आ गए हैं.

दूसरा अधिकारी-जी सर, डेली मेल ने बड़ी नुक्ताचीनी की है. लिखा है मिस्टर गांधी का पास जलाना अंग्रेजी राज की तारीख में अमेरिकी आजादी के बाद सबसे अहम वाकया है.

पहला अधिकारी-ऐसा लिखा है, खैर हाऊस इसके लिए पूरी तरह तैयार है. मिस्टर गांधी को पता लग जाएगा कि वह नाहक ही दौड़ रहा है.

2 टिप्‍पणियां :

  1. आपने इस दिन गाँधी जी से जुडी कई घटनाओं को पढवा दिया। अच्छा लगा पढकर।

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  2. आज हमने बापू का हैप्पी बर्थडे मनाया। आपने इस दिन गाँधी जी से जुडी कई घटनाओं को पढवा दिया।
    बापू ने कर्म को पूजा माना था, इसलिए बापू के हैप्पी बर्थडे पर देशभर में कामकाज बंद रखा गया। मुलाजिम खुश हैं क्योंकि उन्हें दफ्तर नहीं जाना पड़ा, बच्चे खुश हैं क्योंकि स्कूल बंद थे। इस देश को छुट्टियाँ आज सबसे ज्यादा खुशी देती हैं।

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