हिंदी शोध संसार

शनिवार, 27 अक्तूबर 2007

chahat

कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे
तब तुम मेरे पास आना प्रिय, मेरा दर खुला था खुला ही रहेगा, तुम्हारे लिए॥
होती नहीं शर्त कोई प्यार में मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया
दिल में सितारे जो चमके जरा बुझाने लगी आरती का दिया
खुद के नजर से ही गिरने लगो, अँधेरे में जब खुद के घिरने लगो
तब तुम मेरे पास आना प्रिय ये दीपक जला था जला ही रहेगा, तुम्हारे लिए॥
अभी तुमको मेरी जरुरत नहीं, बहुत चाहने वाले मिल जायेंगे
अभी रूप का एक सागर हो तुम, कँवल जितने चाहोगी
दर्पण तुम्हें जब डराने लगे, जवानी भी दामन छुडाने लगे

तब तुम मेरे पास आना प्रिय, मेरा सिर झुका है झुका ही रहेगा तुम्हारे लिए ॥

1 टिप्पणी :

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