हिंदी शोध संसार

सोमवार, 26 दिसंबर 2011

फॉट के बारे में जानकारी चाहिए

ये शब्द सिद्धांत फॉंट में लिखे जा रहे हैं। ये फॉंट कैसा दिखता है कृप्या जानकारी दें। साथ ही, ये भी बताने की कृपा करें कि हिंदी विकिपीडिया में किस फॉंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले विकिपीडिया में मंगल फॉट का इस्तेमाल हो रहा था, जो सुंदर नहीं दिखता था, लेकिन अब किसी अन्य फॉंट के कारण ये सुंदर दिख रहा है। बताएंगे ये फॉंट कौन सा है।
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शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

मजहब नहीं सिखाता आपस में वैर रखना



आठ दशकों से भी अधिक समय से राष्ट्रीय हित में कार्यरत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने विरुद्ध किए जाने वाले तमाम दुष्प्रचार के बाद भी राष्ट्र-निर्माण के अपने कार्य में लगा हुआ है | इसी का एक अनुपम उदाहरण सामने आया है आतंकवाद के साये में जी रहे मुस्लिम बहुल कश्मीर के सन्दर्भ में | ज्ञात हो कि संघ से १९५९ से (५२ वर्षों से) जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता इन्द्रेश कुमार ने कुछ वर्षों पहले घाटी के मुस्लिमों को राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना की थी | इन्द्रेश कुमार पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में सर्वाधिक अंकों के साथ उत्तीर्ण हुए थे परन्तु १० वर्ष की आयु से ही संघ से जुड़े होने के कारण उनका राष्ट्र-निर्माण में ही स्वयं को समर्पित करने का मन था | उनके घोर साहस एवं सपर्पित कर्मयोग का परिणाम तब भी सामने आया था जब मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने लगभग १० लाख मुस्लिम लोगों के हस्ताक्षर गो-हत्या के विरोध में करवा के दिखलाये | मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय एकीकरण के इतने बड़े प्रयास को मीडिया ने कभी दिखाने का प्रयास नहीं किया | यदि कभी दिखलाया भी तो इस रूप में जैसे संघ भी तथाकथित राजनैतिक दलों की तरह तुष्टिकरण के खेल खेल रहा है | यहाँ तक कि राष्ट्र को जोड़ने के इस यज्ञ की सफलता से घबराए सत्ताधारी राजनैतिक गठबंधन की सरकार ने मक्का मस्जिद धमाकों के सिलसिले में सीबीआई को भी इन्द्रेश कुमार के पीछे लगा दिया | परन्तु संघ के प्रत्यक्ष योगदान से एवं इन्द्रेश कुमार के सतत प्रयासों से बने इस संगठन का चमत्कार अब छुपाये नहीं छुप रहा |

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच विगत ३ माह से “हम हिन्दुस्तानी, कश्मीर हिंदुस्तान का”, नाम से एक सशक्त अभियान चलाये हुए था | इस अभियान के अंतर्गत राष्ट्रवादी मुस्लिमों से मस्जिदों में प्रार्थनाएं की, व्याख्यान आयोजित किए एवं देश भर में सभाएं की | अभियान का समापन इस रविवार को दिल्ली में हुआ जिसमें इतनी सर्दी के बाद भी देश के २३ राज्यों के १७५ जनपदों से आये १० हज़ार राष्ट्रवादी मुस्लिमों ने भाग लिया | समापन समारोह में कश्मीर को शेष भारत से अलग संविधान देने वाली धारा ३७० को स्थायी रूप से समाप्त करने, कश्मीरी युवाओं को रोजगार दिलवाने, एवं पाकिस्तान एवं चीन द्वारा हड़प लिए गए कश्मीर के भूभागों को वापस लेने की मांगें उन १० हज़ार मुस्लिमों द्वारा एक स्वर में उठायी गयी |

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In Eng : RSS' Magic - Kashmiri Muslims call for revoking article 370, taking
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चर्चा का प्रारंभ श्रीनगर के मुहम्मद फारूक ने किया | उन्होंने स्पष्ट कहा कि कश्मीर समस्या की जद धारा ३७० ही है और इसे यथाशीघ्र हटाया जाना चाहिए | उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ही नहीं, घाटी के आम मुस्लिम भी यही चाहते हैं | उन्होंने सीधे सीधे शेख अब्दुल्ला और जवाहरलाल नेहरु को कश्मीर समस्या के लिए उत्तरदायी ठहराया |

बारामूला से आये मुश्ताक अहमद पीर ने कहा कि अलगाववाद की राजनीति करने से या लाल चौक पर तिरंगा लहर देने से कश्मीर कि समस्याएं हल नहीं होंगी एवं उसके लिए राज्य की प्रगति में बाधक कारणों के उन्मूलन की आवश्यकता है | बशीर अहमद, जिन्होंने अपना मत “भारत माँ की जय” के नारे के साथ देना आरम्भ किया, उन्होंने कहा कि कश्मीर के विस्थापितों को ६ दशक से मत डालने तक का अधिकार नहीं है जो उन्हें मिलना चाहिए | इंजिनियर गुलाम अली जो बक्करवाल समाज से आते हैं, उन्होंने भी शेख अब्दुल्लाह और नेहरु को ही कश्मीर समस्या का दोषी माना | उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर के राजनैतिक दलों ने जम्मू के निवासियों के साथ अन्याय किया है | उन्होंने ये भी कहा कि धारा ३७० कुछ स्वार्थी नेताओं के हाथ का खिलौना रही है और इसने कभी जनता का भला नहीं किया | गुलाम अली ने भारतीय संसद को पाकिस्तान और चीन से अपना कश्मीर वापस लेने की उसकी वर्षों पुरानी प्रतिज्ञा को पूरा करने को भी कहा |

कश्मीर से आई हालिमा ने आम लोगों की आर्थिक दशा सुधारने वाले प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया | नजीर मीर, जिन्होंने आतंकवाद में अपने तीन भाई गँवा दिए, उन्होंने आजादी की मांग की भर्त्सना करते हुए कहा कि जब हम पहले ही आज़ाद है तो ऐसी मांग के पीछे क्या औचित्य रह जाता है? मुफ्ती मौलाना अब्दू सामी ने हसरत मोहानी, आंबेडकर एवं रफ़ी अहमद किदवई का नाम लेकर कहा कि ये लोग भी ३७० के विरोध में थे परन्तु नेहरु की जिद के कारण ३७० आई और कश्मीरियों का जीवन बर्बाद कर गयी | तब से अब तक सभी राजनैतिक दलों ने इसका दुरूपयोग भारत के विरोध में ही किया है | उन्होंने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की प्रशंसा की और भरोसा दिलाया कि उनका संगठन इन्द्रेश कुमार के नेतृत्व में काम करता रहेगा |

जमात-ए-हिंद के अध्यक्ष ने इस अवसर पर कहा कि यह अभियान राष्ट्र हित में चलाया गया क्योंकि भारत के सीमावर्ती भागों में स्वाधीनता के इतने वर्ष बाद भी स्थितियाँ विकट हैं | उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच पहला मुस्लिम संगठन है जिसने सीमा सुरक्षा का विषय उठाया है | बंगलूरू से आये अब्बास अली बोहरा ने कहा कि दक्षिण भारत के मुस्लिम कश्मीर के राष्ट्रवादी मुस्लिमों के साथ हैं |

muslim-rashtriya-manch-RSS-kashmir-jammu

छत्तीसगढ़ हज समिति के सभापति डॉ. सलीम राज ने कहा कि कांग्रेस ने मुस्लिमों को बदनाम करवाया है | भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष तनवीर अहमद ने कश्मीर समस्या का इतिहास लोगों को स्मरण करवाया | उन्होंने कहा कि जब महाराज हरि सिंह ने २६ अक्टूबर १९४७ को विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए तो कश्मीर का भारत में विलय पूर्ण एवं अंतिम था परन्तु नेहरु की हठधर्मिता एवं एकतरफा युद्धविराम और मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के कारण ये समस्या अस्तित्व में आई | उन्होंने रफ़ी अहमद किदवई के कथन का स्मरण करवाया कि कांग्रेस ने कश्मीर की सभ्यता नष्ट कर देने का काम किया है |

दिल्ली के इमरान इस्माइल ने कहा कि वो इन्द्रेश कुमार ही थे जिन्होंने कश्मीरी विधवाओं की विनती पर ७२४ सिलाई मशीनें कश्मीर भिजवाई थी | भूकंप के समय भी उन्होंने ही पीड़ितों को सहायता उपलब्ध करवाई थी जबकि एक भी मुस्लिम नेता सहायता करने आगे नहीं आया था | इमरान ने कड़े शब्दों में इन्द्रेश कुमार को आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ने के कांग्रेसी हथकंडों की निंदा की और कहा कि ये लोग भारत के मुस्लिमों को संघ के विरूद्ध भड़काते हैं ताकि डरा दिखा कर वोट लिए जा सकें |

भाजपा के डॉ. डी के जैन ने कहा कि कश्मीर की स्वायत्तता की मांग निराधार है | कांग्रेस और दूसरे दल झूठ पे झूठ फैला कर देश को बांटने के षड़यंत्र कर रहे हैं और संदेह का माहौल देश में पैदा कर रहे हैं | इन्द्रेश कुमार जो कोहरे के कारण ट्रेन के देरी से चलने के कारण सभा में नहीं पहुच पाए, उन्होंने मोबाइल फोन से अपना संबोधन दिया | उन्होंने कहा कि सरकार निर्दोषों को आतंकवादी बनाने का कुत्सित खेल खेल रही है और भारत विरोधी तत्त्व एवं राजनैतिक दल कश्मीर के लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं | उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच शान्ति, सौहार्द एवं आपसी सद्भाव से भरपूर भारत के निर्माण का सात्विक प्रयास है और उन्हें विश्वास है कि यह अवश्य सफल होगा |

एक ओर तमाम तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दल अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिए मुस्लिम समाज को वोट बैंक मान कर उन्हें आरक्षण की अफीम पिलाने में जुटे हैं ताकि समाज को धर्म के नाम पर बाँट सकें | तथाकथित पिछडों के अधिकार की बात करने वाले जातियों में समाज को पहले ही बाँट चुके हैं | वही दूसरी ओर हिंदू-मुस्लिम का भेद मिटा कर मुस्लिमों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास में एवं जातियों के भेद मिटा कर हिंदू समाज को एक करने में लगे संघ के संगठन जुटे हुए हैं | जो लोग संघ के स्वयंसेवकों से परिचित हैं, अथवा संघ की पचासों अनुसांघिक संस्थाओं में से किसी से जुड़ कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगे हुए हैं, उनके लिए संघ सम्मान का विषय है | कितनी ही बड़ी संख्या में परिवार होंगे जिनके बच्चे संघ के विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं |

सच्चाई दिखलाना मीडिया का काम होता है, परन्तु जब मीडिया स्वयं कोयले की दलाली में (नीरा राडिया के टेपों में) मुँह काला कर चुका हो, तो राष्ट्रवादी मीडिया की कमी जनता को खलती है | समाज और देश को तोड़ने वाले लोग, वोट बैंक की राजनीति करने वाले लोग, तथाकथित बुद्धिजीवी व मीडिया के लोगों ने मिल कर दुष्प्रचार का जो एक गहरा जाल संघ के इर्द-गिर्द बुना है, भारत की जनता को इसके आर पार देखने की आवश्यकता है |

आईबीटीएल से साभार

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

सिटीजन चार्टर- सरकारी चार्टर और अन्ना के चार्टर में अंतर

सिटीजऩ चार्टर: अन्ना के प्रस्ताव बनाम सरकारी बिल

सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार की एक बड़ी शिकायत रिश्वतखोरी को लेकर है. व्यापार का लाईसेंस लेना हो, मकान का नक्शा पास करना हो, रजिस्ट्री करानी हो, बैंक से लोन लेना हो, पासपोर्ट अथवा ड्राविंग लाईसेंस बनवाना हो, राशनकार्ड, नरेगा जॉबकार्ड यहां तक कि वोटर कार्ड बनवाने में भी रिश्वत चलती है


अन्ना हज़ारे ने रिश्वत के बिना काम होने और रिश्वतखोरों को दंड लगाने की व्यवस्था लोकपाल क़ानून के ही तहत बनाने का प्रावधान रखा है सरकार ने इसके लिए अलग से क़ानून बनाने के लिए बिल संसद में पेश किया है:-


क्या है दोनों प्रस्तावों में बुनियादी अंतर -


अन्ना के प्रस्ताव (जनलोकपाल कानून के तहत)
सरकार के प्रस्ताव (जनशिकायत निवारण के लिए अलग कानून के तहत)
1
इस काननू के लागू होने के बाद समुचित समय सीमा में, अधिकतम एक वर्ष के अंदर प्रत्येक लोक प्राधिकरण (पब्लिक अथॉरिटी) एक सिटीजऩ चार्टर बनाएगा
लगभग ऐसी ही व्यवस्था की गई है
2
प्रत्यके सिटीजऩ चार्टर में उस लोक प्राधिकरण द्वारा किए जाने वाले कार्यों की समय प्रतिबद्धता के बारे में, और उस समय सीमा में कार्य पूरा करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के बारे में स्पष्ट विवरण होगा
लगभग ऐसी ही व्यवस्था की गई है
3
यदि कोई लोक प्राधिकरण, इस काननू के लागू होने के एक वर्ष के अंदर सिटीजऩ चार्टर तैयार नहीं करता है तो उस प्राधिकरण से चर्चा के बाद, लोकपाल/लोकायुक्त स्वयं उसका सिटीजऩ चार्टर तैयार करेगा और यह उस लोक प्राधिकरण पर बाध्य होगा.
सरकारी सिटीजऩ चार्टर बिल में लोकपाल/लोकायुक्त के पास अथवा अलग से बन रहे जनशिकायत आयोग के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है
4
प्रत्येक लोक प्राधिकरण पाने सिटीजऩ चार्टर को लागू करने के लिए आवश्यक संसाधनों का आकलन करेगा और सरकार उसे वह संसाधन उपलब्ध कराएगी
ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है: अत: कोई भी विभाग संसाधन उपलब्ध न होने,
कर्मचारियों की संख्या कम होने आदि कारणों को बहाना बनाकर तय समय
सीमा में काम न करने की ज़िम्मेदारी से बचेगा.
5
प्रत्येक लोक प्राधिकरण, अपने सभी केन्द्रों में, जहां जहां भी उसके कार्यालय हों, एक कर्मचारी को जनशिकायत निवारण अधिकारी के रुप में नामित करेगी. कोई भी नागरिक सिटीजऩ चार्टर का उल्लंघन होने की स्थिति में जनशिकायत अधिकारी के पास शिकायत कर सकेगा.
लगभग ऐसी ही व्यवस्था की गई है
6
किसी भी कार्यालय में उसका वरिष्ठतम अधिकारी जनशिकायत निवारण अधिकारी के रूप में नामित होगा.
ऐसा नहीं है
7
जनशिकायत निवारण अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह , नागरिकों से सिटीजऩ चार्टर के उल्लंघन की शिकायतें प्राप्त करे और प्राप्ति के अधिकतम 30 दिन के अंदर उनका समाधान करे.
सरकार के प्रस्ताव में जनशिकायत निवारण अधिकारी के यहां शिकायत करने पर उनकी पावती (रिसिप्ट) लेने के लिए भी दो दिन का समय रख दिया है इसका
मतलब यह हुआ कि शिकायत करने के वक्त शिकायत के काग़ज़ लेकर रख लिए जाएंगे और अगर उसे पावती चाहिए तो अगले दो दिन तक कम से कम एक चक्कर जरू़ र कटवाया जाएगा. हालांकि बिल में यथासंभव ईमले अथवा एसएमएस से भी पावती भेजने की बात कही गई है लेकिन व्यावहारिकता में एक सामान्य सरकारी दफ्तर में किसी आम आदमी को एक सामान्य आवेदन की रिसिप्ट तक नहीं दी जाती.शिकायत की पावती देने के लिए दो दिन का समय देने से शायद ही किसी को हाथों हाथ पावती मिले.


8
जनशिकायत निवारण अधिकारी द्वारा 30 दिन की समय सीमा में शिकायत का निवारण नहीं किए जाने की स्थिति में विभाग के प्रमुख के पास इसकी शिकायत की जा सकती है
विभाग के प्रमुख के पास शिकायत करने की कोई प्रावधान नहीं है.
9
यदि विभाग प्रमुख भी अगले 30 दिन के अंदर समस्या का समाधान नहीं करता है तो इसकी शिकायत लोकपाल के न्यायिक अधिकारी के समक्ष की जा सकेगी लोकपाल प्रत्यके जिले में कम से कम एक न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति करेगा. किसी जिले में कार्य की अधिकता को देख़ते हुए यह संख्या एक से अधिक भी हो सकती है लोकपाल द्वारा न्यायिक अधिकारी के पद पर नियुक्तियां अवकाश प्राप्त न्यायधीश, अवकाश प्राप्त सरकारी अधिकारी अथवा इसी किस्म के अन्य सामान्य नागरिकों के बीच से की जाएंगी
सिटीजऩ चार्टर बिल के अनुसार जनशिकायत अधिकारी के 30 दिन में शिकायत दूर न करने पर एक डेज़ीगिनेटिड अथॉरिटी के पास अपील की जाएगी. बिल में यह तो लिखा है कि यह डेज़ीगेनेटेड अथॉरिटी उस विभाग से अलग एक अधिकारी होगा. उसके पास सिविल कोर्ट की पावर भी होगी. इसका काम होगा तीस दिन में अपील का निस्तारण करना लेकिन यह कौन अधिकारी होगा? क्या यह अलग से नियुक्त किया जाएगा अथवा किसी अन्य विभाग के अधिकारी को यह दायित्व दिया जा सके गा? क्या हर विभाग के लिए अलग अलग अधिकारी इसके लिए बाहर से नियुक्त किए जाएंगे. अगर नई नियुक्ति होगी तो वह किस तरह होगी? किस योग्यता के व्यक्ति की होगी? इस बारे में बिल में कुछ नहीं लिखा है. इसका फ़ायदा उठाकर सरकार राजनीतिक संपर्क वाले किसी भी व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगी. और जन शिकायत निवारण की व्यवस्था ज़िला स्तर पर राजनीतिक कृपापात्र लोगों की नियुक्ति का धंधा बन कर रह जाएगी.
यह डेज़ीगेनेटेड अथॉरिटी ज़िला स्तर पर एक होगी, पूरे राज्य के लिए एक होगी अथवा हरेक विभाग में एक जन शिकायत निवारण अधिकारी के लिए अलग अलग होगी? इसका कोई ज़िक्र बिल में नहीं है.


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यदि न्यायिक अधिकारी की राय में शिकायत निवारण का कार्य उचित तरीके से नहीं हुआ है तो वह, संबद्ध पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए, विभाग प्रमुख सहित,शिकायत निवारण न होने के लिए जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाएगा, जोकि शिकायत निवारण में हुई देरी के लिए अधिकतम 500 रुपए प्रतिदिन की दर से होगा और 50,000 रुपए प्रति अधिकारी से अधिक नहीं होगा. यह राशि जिम्मेदार ठहराए गए दोशी अधिकारियों के वेतन से काटी जाएगी. यदि इस तरह के मामले में पीड़ित व्यक्ति सामाजिक अथवा आर्धिक रूप से पिछड़ा है तो दोशी अधिकारी पर ज़ुर्माने की राशि दोगुना हो जाएगी.
डेज़ीगेनेटेड अथॉरिटी के पास ज़ुर्माना लगाने का अधिकार तो है अंगे्रज़ीं भाषा में शैल इंपोज पनेल्टी की जगह इंपोज पनेल्टी लिखा गया है जिससे जुर्माना लगाना या न लगाना अधिकारी के विवेक पर छोड़ दिया गया है. सूचना के अधिकार के मामले में हमने देखा है कि शैल इंपोज़ पेनल्टी लिखे होने के बावजूद सूचना आयुक्त सूचना न दने वाले अधिकारियो पर ज़ुर्माना नहीं लगाते इसका नुकसान यह है कि अब सूचना मिलती नहीं है, सूचना आयोग का डर अधिकारियों के मन में कहीं नहीं बचा है और धीरे धीरे लोग इस क़ानून के प्रति निराश होने लगे हैं
काम होने में प्रतिदिन देरी पर ज़ुर्माना लगाने की जगह कुल मिलाकर अधिकतम 50,000 रुपए तक के ज़ुर्माने का प्रावधान रखा गया है. ज़ुर्माने की राशि शिकायतकर्ता को मुआवज़े के रूप में दिलवाए जा सकने का भी प्रावधान है लेकिन सामाजिक और आर्धिक वर्ग के पिछड़े शिकायतकर्ता को दोगुना मुआवज़ा
दिलवाने अथवा ऐसे मामलों में दोशी अधिकारी पर दो गुना ज़ुर्माना लगाने का प्रावधान नहीं रखा गया है.


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लोकपाल के न्यायिक अधिकारी के भ्रष्ट होने की शिकायत लोकपाल के पास की जा सकेगी
सबसे ख़तरनाक बात है कि यह डेज़ीगेनेट अथॉरिटी किसके प्रति जवाबदेह होगा? सरकार के प्रति या जनशिकायत आयोग के प्रति? बिल के हिसाब से तो यह किसी के प्रति जवाबदेह ही नहीं होगा. ऐसी स्थिति में अगर यह अधिकारी ही भ्रष्ट हो जाए तो इसके खिलाफ एक्शन कौन लेगा?
12
ऐसे मामलों में लोकपाल का न्यायिक अधिकारी एक समय सीमा तय कर, संबंधित अधिकारी को शिकायतकर्ता की शिकायत के निवारण का आदेश भी जारी करेगा.
लगभग ऐसा ही है
13
किसी अधिकारी के खिलाफ बार बार एक ही तरह की शिकायतें आने को भ्रष्टाचार माना जाएगा.
यह व्यवस्था नहीं की गई है
14
किसी अधिकारी के खिलाफ बार बार शिकायत आने की स्थिति में, न्यायिक अधिकारी, उस शिकायत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को पद से हटाने अथवा उन्हें पदोवनत करने की सिफारिश लोकपाल की खंडपीठ के पास करेगा. लोकपाल की खंडपीठ, अधिकारियों के पक्ष की समुचित सुनवाई करते हुए, सरकार को ऐसी सख्त कार्रवाई की सिफारिश करेगी.
यह व्यवस्था नहीं की गई है
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प्रत्यके लोक प्राधिकरण, प्रत्यके वर्ष, अपने सिटीजऩ चार्टर की समीक्षा कर उसमें समुचित बदलाव करेगा. यह समीक्षा, लोकपाल के प्रतिनिधि की उपस्थिति में, जन चर्चाओं के माध्यम से की जाएगी
इस बारे में स्पष्ट व्यवस्था नहीं है.
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लोकपाल, किसी लोक प्राधिकरण के सिटीजऩ चार्टर में परिवर्तन हेतु आदेश जारी कर सकता है. लेकिन यह परिवर्तन लोकपाल की तीन सदस्यीय खंडपीठ से अनुमोदित कराने होंगे
इस बारे में स्पष्ट व्यवस्था नहीं है.
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संबंधित लोक प्राधिकरण, सिटीजऩ चार्टर में परिवर्तन संबंधी लोकपाल के आदेश को, ऐसे आदेश की प्राप्ति के एक महीने के अंदर लागू करेगा.


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प्रत्येक न्यायिक अधिकारी के कार्य का सामाजिक अंकेक्षण प्रत्येक 6 महीने में किया जाएगा. सामाजिक अंकेक्षण में न्यायिक अधिकारी जनता के समक्ष प्रस्तुत होगा, अपने कार्य के संबंध में सभी तथ्य प्रस्तुत करेगा, जनता के सवालों के जवाब देगा और जनता के सुझावों को अपनी कार्य प्रणाली में शामिल करेगा. जन सुनवाई की ऐसी प्रक्रिया लोकपाल के वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति में संपन्न होगी.
यह व्यवस्था नहीं की गई है
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किसी भी मामले को तब तक बंद नहीं किया जाएगा जब तक कि शिकायतकर्ता की शिकायत का निवारण नहीं हो जाता अथवा न्यायिक अधिकारी किसी शिकायत को खारिज नहीं कर देता.
यह व्यवस्था नहीं की गई है
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जनशिकायत आयोग की कोई आवश्यकता ही नहीं है. (वस्तुत: लोकपाल/लोकायुक्त के रहते जनशिकायत आयोग बनाकर एक तरह से आयुक्तों की भारी भरकम फौज खड़ी कर ली जाएगी. जिसकी आवश्यकता ही नहीं है. अगर इस बिल में प्रस्तावित डेज़ीगेनेटेड अथारिटी को ही लोकपाल/लोकायुक्त के न्यायिक अधिकारी का दर्जा दे दिया जाता तो उसकी जवाबदेही भी तय हो जाती, उसका बजट भी लोकपाल से आता और जनशिकायत आयोग की आवश्यकता भी न पड़ती. )
अगर डेज़ीगेनेटेड अथारिटी भी 30 दिन में समस्या का निवारण नहीं करता है तो अगली अपील राज्य सरकार के मामलों में राज्य जनशिकायत आयोग एवं केंद्र सरकार के मामले में केंद्रीय जनशिकायत आयोग में की जा सकेगी. (प्रत्येक आयोग में 10 आयुक्त होंगे जो प्रमुख़त: अवकाश प्राप्त सरकारी अधिकारी अथवा न्यायधीश होंगे. इन आयोगों के लिए आयुक्तों का चयन एक बेहद कमज़ोर प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है. संभावना है कि सरकारों में रिटायर होने वाले सचिव आदि अधिकारी सूचना आयुक्तों की तरह ही इन पदों पर भी क़ब्ज़ा जमा लें. उल्लेखनीय है कि सरकार के सिटीज़न चार्टर क़ानून में जनशिकायत आयुक्त का दर्जा मुख्य सचिव के बराबर का होगा और इसके लागू होते ही देशभर में करीब 250 पद ऐसे बनेंगे यानि एक साथ 250 अवकाश प्राप्त आइएएस अधिकारियों और न्यायधीशॉ के लिए कम से कम मुख्य सचिव स्तर की कुर्सी तो बन ही गई. और उनकी ज़िम्मेदारी के नाम पर होगी एक लचर व्यवस्था जहां सरकार खुद नहीं चाहेगी कि ये लोग कुछ काम करें) जनशिकायत आयोग के पास भी सिविल कोर्ट के अधिकार होंगे और उनके पास भी ज़ुर्माना आदि लगाने के वही अधिकार होंगे जो डेज़ीगेनेटेड अथॉरिटी को दिए गए हैं
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लोकपाल/लोकायुक्त सदस्यों के पैनल के पास सिर्फ उसके न्यायिक अधिकारी के ठीक से काम न करने की शिकायतें जाएंगी. उसका काम जनशिकायत निवारण अधिकारी के बारे में लोगों की अपील पर सुनवाई करना नहीं होगा. अत: उसके पास आने वाली शिकायतें बहुत कम रहेंगी.
अगर जनशिकायत आयोग में भी 60 दिन में राहत नहीं मिलती है तो अगली अपील लोकपाल/लोकायुक्त के पास की जा सकेगी. यहां शिकायत सुनवाई की
कोई समय सीमा तय ही नहीं की गई है. (इस तरह सारी शिकायतों का भंडार लोकपाल/लोकायुक्त कार्यालय में जमा हो जाएगा. उनके पास कोई पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण वहां भी शिकायतों की सुनवाई शायद ही हो. )


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जिला ब्लॉक स्तर पर न्यायिक अधिकारी का बजट भी लोकपाल/लोकायुक्त के पास से आएगा


जनशिकायत आयोगों और डेज़ीगेनेटेड अथारिटी के बजट सरकार की मेहरबानी पर निर्भर रहेंगे. अक्सर देखा गया है कि सरकारें इन आयोगों को कमज़ोर करने के लिए, जानबूझकर, उन्हें पर्याप्त संख्या में कर्मचारी/अधिकारी एवं संसाधन ही नहीं उपलब्ध करातीं और इनके मुखिया संसाधनों का रोना रोते हुए काम एवं जिम्मेदारी से बचते रहते हैं





इस तरह अगर आपका किसी व्यापार के लिए लाईसेंस, मकान का नक्शा, ड्राविंग लाईसेंस, राशनकार्ड, जॉब कार्ड, जाति प्रमाण पत्र आदि बनने में रिश्वतखोरी की शिकायत आप करना चाहते हैं तो जनलोकपाल के अनुसार आपको अधिकतम जिला स्तर तक लोकपाल के न्यायिक अधिकारी तक जाना होगा. इस तरह काम होने में अधिकतम 2 से 3 महीने का समय लगेगा. इतना ही नहीं अगर किसी विभाग के प्रमुख पर एक बार भी ज़ुर्माना लग गया तो वह आगे से सुनिश्चित करेगा कि उसके यहां सिटीजऩ चार्टर का पालम ठीक से हो.
लेकिन सरकार के सिटीजऩ चार्टर बिल के प्रस्तावों में आप जनशिकायत अधिकारी, उसके बाद डेज़ीगेनेटेड अथॉरिटी, उसके बाद जनशिकायत आयोग और उसके बाद लोकपाल/लोकायुक्त के पास जाएंगे. इसमें कम से कम एक साल का समय लगेगा, और लोकपाल/लोकायुक्त के पास अपील की सुनवाई कब होगी यह तो भगवान ही जाने.

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

अन्ना हजारे के प्रति

हलचल मचा गया,
संत वो, हलचल मचा गया।

पथ में पड़े जो रजकण थे,
वो भी भरने लगे हुंकार।
एक बुलाए, हजारों आए,
करने लगे पुकार।
उठाओ ऊंगली,
बांधो मुठी,
जीना सिखा गया,
संत वो, हलचल मचा गया।

वक्त आ गया जगने का अब
तू-तू, मैं-मैं छोड़ो,
हमें समझ नादान, लड़ाते
उनसे नाता तोड़ो,
सुनो पुकारे, अन्ना हजारे
नव युग का गांधी आ गया
संत वो, जीना सिखा गया।

देख तुम्हारे, बुलंद इरादे
प्राण फूंक दे मुर्दों में,
तेरे हाथों में देख तिरंगा
हाहाकार मच गया भ्रष्टों में
कपटी और कुटिल ताकतों से
लड़ना सिखा गया
संत वो, हलचल मचा गया।

रविवार, 18 दिसंबर 2011

पांच मिनटोंमें सीखो कम्प्यूटर पर हिंदी लिखना


नोट- ये लेख लीना जी द्वारा विरचित है। जो leena.mehendale@gmail.com से प्राप्त हुआ है। अंत में मैंने एक छोटी जानकारी मात्र दी है।
बच्चों, अब तो स्कूलोंमें संगणक (कम्प्यूटर) सिखाया जाने लगा और तुममेंसे
कईयोंके घर में भी होगा। तो क्या तुम जानते हो कि संगणक पर हिंदी सीखने
के लिये एक युक्ति है जिसमें केवल आधा घंटा पर्याप्त है। वह भी अंग्रेजी
टंकन-ज्ञान पर निर्भरता के बिना। और अगर पूरी बात कहूँ तो हरेक भारतीय
भाषा सीखनेकी यही युक्ति है।

इस युक्तिका नाम है इनस्क्रिप्ट की-लेआउट अर्थात् संगणकके की-बोर्ड या
कुंजीपटलपर चलनेवाला एक विशिष्ट वर्णक्रम। लेकिन इसे सीखनेसे पहले
तुम्हें बस एक बार अपने संगणककी परीक्षा लेनी है और अगर वह खरा उतरा तो
तुम यह युक्ति सीख सकते हो।
तो पहले संगणककी परीक्षा इस प्रकार -- Go to start -> setting -> control
panel -> Regional and Language -> click
एक खिडकी खुलेगी जिसके ड्रॉप-डाउन मेन्यू पर लिखा होगा - ENG. मेन्यूमें
संसारकी बीसियों भाषाएँ मिलेंगी, और यदि हिंदी भी मिल जाय तो समझो
तुम्हारा संगणक परीक्षा पास हो गया। अब हिंदीको क्लिक करो और अप्लाय तथा
ओके के बटन भी दबाओ।। ऐसा करते ही संगणकके सबसे नीचेवाली पट्टीपर (टास्क-
बार पर) EN दीखने लगेगा और क्लिक करनेपर हिंदी का ऑप्शन भी मिलेगा।
यह काम केवल सबसे पहली बार करना है -- बारबार नही।
अब पहले वर्ड फाईल खोलकर फिर हिन्दी का ऑप्शन ले आओ और कोई भी कुंजी दबाओ
तो हिंदी अक्षर मिलेंगे।
तो अब तुम्हारा संगणक पास हो गया और तुम इनस्क्रिप्ट विधीसे हिंदी सीखना
आरंभ कर सकते हो।

अब कोई चित्र देखो जिसमें इनस्क्रिप्ट ले-आऊट बताया गया है।
इस लेआऊटमें वर्णोंका क्रम वैसे ही चलता है जैसा हमने कक्षा एकमें पढा
होता है -- अर्थात् कखगघ..., चछजझ..., या अआइईउऊ... । अतः कुंजियाँ
खोजनेकी दिक्कत नही है, जो अंग्रेजी सीखनेमें है । साथही इसमें तमाम
व्यंजन दायें और स्वरकी मात्राएँ बाँये हाथसे लगानेका चलन है, जिससे
अपनेआप एक लयसी बँध जाती है और थोडीही प्रॅक्टिसमें टंकनका काम तुम शीघ्र
गतिसे कर सकते हो।

अब चिन्ता छोडो की तुम्हारे कुंजीपटलपर हिंदी स्टिकर तो लगे ही नही हैं
-- बस निश्चिंत होकर चित्र देखो, अपना कुंजीपटल देखो और सीखो यह युक्ति।

पहले दो मिनटोंमें सीखो बीस अक्षर
कख-गघ --- सामान्य कुंजीपटलके अंग्रेजी अक्षर K-I की जोडी देखो। यही कख
और गघ हैं।
तथ- दध --- अगली दो कुंजियाँ L-O हैं जो तथ, दध के लिये हैं,
चछ- जझ --- अगली चछ,जझ की
टठ -डढ --- और उससे अगली टठ डढ की।
र ह --- क के बाँई ओर JU की कुंजीसे र-ह लिखते हैं और
पफ -बभ ---उससे बायें H-Y पर पफ, बभ हैं।
कुंजियोंकी ये जगहें समझकर आत्मसात् करनेको दो मिनट पर्याप्त हैं।
कठिन (भारी) अक्षरके लिये (अर्थात् खघ,थध,छझ,ठढ,फभ) शिफ्टके साथ कुंजी
दबानी होगी।

अगले दो मिनटोंमें सीखो और बीस अक्षर

बाँईं ओर की पाँच कुंजी-जोडियों बाराखडी के दस स्वरोंके लिये हैं। इन्हे
भी हमने पहली कक्षामें रटा था -- अआइईउऊएऐओऔअंअः

अ आ – अंग्रेजी अक्षर DE की जोडी
इ ई – FR की जोडी
उ ऊ – GT की जोडी
ए ऐ – SW की जोडी
ओ औ – AQ की जोडी
इनका क्रम ओऔ,एऐ,अआ,इई,उऊ रखा गया है क्योंकि इसमे सुविधा है। यहाँ
अंग्रेजी अक्षर मैंने केवल पहली बार जगह बताने के लिये लिखे हैं, याद
करने के लिये नही।
शिफ्टकुंजी के साथ लिखनेपर स्वतः स्वर लिखा जाता है परन्तु किसी व्यंजनकी
मात्रा लगाने के लिये शिफ्ट कुंजी नही लगेगी।
इस प्रकार दस मात्राएँ तथा उन्हें लगाने का तरीका समझने के लिये अगले दो
मिनट पर्याप्त हैं।

इन कुंजियोंको समझकर यदि हम प्रॅक्टिस करें --
काकी, चाची, दादी, ताई, ताऊ, बाबा, पापा, काका, चाचा, टाटा, दीदी -- तो
इस कुंजी रचना की सरलता तत्काल मोह लेती है।

बचे अक्षरोंको एक बार ढूँढ कर समझ जा सकता है।
शिफ्टके साथ ५,६,७,८, अंकोंकी कुंजियोंसे ज्ञ त्र क्ष श्र तथा + की
कुंजीसे ऋ लिखते हैं।
सबसे निचली पंक्ति में तिसरी कुंजीसे आरंभ कर म (शिफ्ट के साथ ण), न, व,
ल (शिफ्ट के साथ मराठी, कन्नड आदि भाषाओंका ळ), स (शिफ्ट के साथ श), ष
तथा अन्तिम कुंजीपर य (शिफ्ट के साथ बंगालीका दूसरा य) हैं।
ड से अगली कुंजी पर ञ है। शिफ्ट के साथ ह की कुंजीसे ङ लिखते हैं।
अनुस्वार के लिये अक्षर लिखने के बाद अंग्रेजी X की कुंजी लगाना। इसे
शिफ्ट के साथ लगानेपर चंद्रबिंदु लगता है।
जरासे अभ्यास से ये याद हो जाते हैं।

संयुक्त अक्षर
संस्कृत के नियमानुसार व्यंजन में अ लगाकर उसे पूरा किया जाता है। जब कि
यहाँ किसी भी कुंजीसे पूर्ण व्यंजन लिखा जाता है ताकि अ की मात्रा बारबार
न लगानी पडे। अतः इस कुंजीपटलमें अ की कुंजी (Dअक्षर पर) लगानेपर वहाँ
हलन्त लगता है और अगला व्यंजन उसमें जुड जाता है।
यदि लिखना हो क्रम तो क , हलन्त ,र ,म
परंतु कर्म लिखने के लिये क, र , हलन्त , म लिखा जायगा।
कृपा लिखनेके लिये क में ऋ की मात्रा (बिना शिप्ट के) और विसर्ग चिह्न के
लिये शिफ्टके साथ - की कुंजी लगती है।
संगणक के सामने बैठकर लिखने लगो तो यह सब पढनेमें जितना समय लगता है उससे
आधे समय में ही यह सब सीखा जाता है।

यदि संगणक ही परीक्षा में फेल गया तो तुम्हें उसकी मदद करनी पडेगी।
Regional and Language के मेन्यू में हिंदी न मिले तो उसे विण्डोजकी सीडी
से लोड करना पडेगा। विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम की सीडी में एक i386 फाईल
होती है जिससे ये हिंदी फॉण्ट संगणककी समझ में आते हैं। यह फाइल विण्डोज
की सीडी पर रखी होती है, लेकिन हर संगणक पर बाय डिफाल्ट लोड नही होती ।
इसीलिये तुम्हें अलगसे डालनी पडेगी। यदि तुम्हारे पास सीडी न हो तो किसी
दोस्तकी सीडीसे i386 फाईल को पेनड्राइव्ह पर ले आओ और उससे लोड करो।
तो बस सीखो हिंदी फटाफट और भेजो मुझे हिंदी ईमेल मेरा पता है --
leena.mehendale@gmail.com
यदि संभव हो तो इनस्क्रिप्ट सीखने का एक विडियो भी देखो जो मैंने अपनी
यूट्यूब sanskrittv पर रखा है।

संपूर्ण विधि को वीडियो में देखने लिए इस लिंक को चटकाएं
विशेष नोट- हां, अगर संगणक(कंप्यूटर) परीक्षा में असफल हो गया हो तो एक और युक्ति से उसमें हिंदी सक्षम किया जा सकता है।
बस अपने संगणक में हिंदी टूलकिट इंस्टॉल कर लीजिए और इस लेख में बताए गए नियम के अनुसार कंट्रोल पैनल में जाकर हिंदी भाषा विकल्प सेट कर लीजिए।
इस कड़ी में सब कुछ विस्तार से बताया गया है और यहां से हिंदी टूलकिट डाऊनलोड किया जा सकता है।--
यहां से--

बुधवार, 7 दिसंबर 2011

अब बदलने की बारी है.. संदर्भ- जन लोकपाल











डरते
जिससे भ्रष्ट, चाहती जनता वो जन लोकपाल।
भ्रष्टाचार का कलंक मिटानेवाला है जन लोकपाल।
लोकपाल जिसके अंदर हो प्रधानमंत्री से प्यून।
क्योंकि पद का नाम देखकर, अपराध न होता न्यून।।
खल पर कसे शिकंजा, स्वतंत्र सीबीआई को होने दो।
लोकपाल के अंदर लाकर, काम नेक करने दो।।
बैठे न्याय मंदिर में जो है, दें लोकपाल का संग।
उनके बिना कैसे पूरा हो, ये पवित्र सत्संग।।
विशेषाधिकार के नाम पर संसद, को भी न छोड़ा जाए।
सांसदों का भी भ्रष्ट आचरण, निगरानी में आए।।
आम आदमी अधिक त्रस्त है, निचली नौकरशाही से।
भ्रष्टाचार संग लेट-लतीफी, बाबूओं की मनमानी से।।
लोकपाल के जैसे ही हों, हर राज्य में लोकायुक्त।
केवल नेताओं के हाथों, ये भी ना हो नियुक्त।।
कितनी बार कही जा चुकी, सड़ गया ये तंत्र।
सड़े हुए इस तंत्र में कैसे, सिसक रहा लोकतंत्र।।
बहुत हो चुका, अब हठ छोड़ो, बदलने की बारी है।
तुमसे नहीं हुआ तो अब, जनता की तैयारी है।।