हिंदी शोध संसार

शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

भेड़-बकरियां ही हैं हम

भेड़ बकरियों से ज्यादा कुछ नहीं हैं हम. फिर शशि थरूर के बयान पर बवाल कैसा? कौन लोग हैं जो शशि थरूर के बयान पर बबाल मचा रहे हैं? इन लोगों में तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मीडिया शामिल है, जो कांग्रेस को महान साबित करने में तन, मन और धन(गैर-वाजिब) जुटी हुई है.

गुरुवार, 17 सितंबर 2009

पुराने हिंदी गानों के शौकीन हैं तो यहां आइये.

 क्या आप पुराने हिंदी गानों के शौकीन हैं. अगर हां, तो बिना तामझाम वाले इस लिंक पर जाइए, गीत चुनिए और उतार लीजिए.
जय हिंदी जय भारत

सोमवार, 14 सितंबर 2009

हिंदी दिवस कैसे मनायें

 हिंदी दिवस मनाने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है,
1. अपने एड्रेसबार पर www.hi.wikipedia.org टाइप करिए. एन्टर करते ही विकिपीडिया का पेज खुलेगा.
2. अपना मनपसंद विषय चुनिए, जिसके बारे में आप जानते हों.
3. उसे विकिपीडिया के खोज विकल्प में खोजिए. वो विषय विकिपीडिया में नहीं है तो लाल रंग से create the page -- on this wiki पर क्लिक करें और उस विषय पर लिख डालें एक लेख.
3. अगर लिखा हुआ है तो दूसरा विषय चुने या उसी को पूर्ण लेख बनाये.
4. आपका हिंदी दिवस उन लोगों से अच्छा होगा, जो हिंदी दिवस पर तथाकथित मठाधीशों और सरकार को गाली देते हैं.
जय हिंदी जय भारत
 नोट- यह पोस्ट वर्तिका नंदा जी के ब्लॉग से ज्यों की त्यों उद्धृत की जा रही है. जो दैनिक भास्कर में भी प्रकाशित हुई थी.

खबर यहां भी है

खबरों के घेरे में अब चर्च भी आने लगे हैं। हाल ही में इनके खबर में आने की दो वजहें रही हैं। पहली वजह वह ताजा सर्वेक्षण है जिसमें बेबाकी के साथ यह बात सामने आई है कि केरल की एक चौथाई से ज्यादा नन अपनी मौजूदा स्थिति से नाखुश हैं और दूसरी वजह है- केरल की एक नन की लिखी हुई आत्मकथा।

सबसे पहले सर्वेक्षण की बात। फादर जॉय कालियथ ने सर्वेक्षण करते हुए केरल के विभिन्न हिस्सों में रह रही ननों से बात की। वे इस कारण की तह में जाना चाहते थे कि क्या वजह है कि पिछले 9 साल में अकेले केरल में ही 14 ननों ने आत्महत्या कर ली और कई चर्च को छोड़ कर भाग रही हैं।

गुरुवार, 10 सितंबर 2009

क्या डेढ़ सौ साल बाद भारत मरूस्थल बन जाएगा?


क्या होगा जब मॉनसून हमेशा-हमेशा के लिए भारत से रूखसत हो जाएगी. तब क्या भारत मरूस्थल में तब्दील हो जाएगा. विशेषज्ञों की माने से सौ-डेढ़ सौ साल में ऐसी स्थिति आने वाली है. जब देश से मॉनसून हमेशा हमेशा के लिए दूर चली जाएगी.