हिंदी शोध संसार

शनिवार, 31 अक्टूबर 2009

इंदिरा गांधी को याद करवाया जा रहा है

न्यूज चैनलों पर चल रहे है इंदिरा स्मरण एपिसोड को देखकर आसानी से समझता जा सकता है कि कुछ लोग इस देश को कैसे चला रहा है.images
प्रेमचंद ने ठीक ही कहा था कि गवर्नमेंट कुछ पढ़े लिखे लोगों(निहायत ही चालाक) द्वारा गरीबों को दबाने के लिए बनाया गया संगठन है.
टेलीविजन चैनलों पर चला रहे इंदिरा एपिसोड का अर्थ ये बिल्कुल नहीं लगाया जाना चाहिए कि अचानक टेलीविजन चैनलों को इंदिरा प्रेम उत्पन्न हो गया है या वे इंदिरा गांधी के कथित योगदान को याद कर रहे हैं.  दरअसल ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है. बल्कि टेलीविजन चैनलों को उनकी हैसियत के हिसाब से पैसे दिए गए, उसी के अनुसार उसे वीडियो फुटेज मुहैया कराए गए और कांग्रेसी भक्तों द्वारा प्रत्येक एपीसोड की पटकथा तैयार की गई-
चैनलों पर चल रहे कुछ कार्यक्रमों की बानगी-
इंदिरा बिन इंडिया-
कतरा-कतरा हिंदुस्तान.. आदि
इंदिरा स्मरण एपिसोड में जनता के टैक्स के पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे हैं. चैनलों को लाखों-करोड़ों रुपये दिए जा रहे हैं. चुनाव प्रसार के तर्ज पर.
ये सब ऐसे समय में हो रहा है, जबकि पूरे देश के लोग उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती द्वारा उत्तरप्रदेश में बनाए जा रहे स्मारकों पर सवालिया निशान खड़े रहे हैं. मायावती पर जनता के पैसे के दुरुपयोग का आरोप लग रहा है. आखिर, कोई केंद्र सरकार से पूरे कि इंदिरा संस्मरण एपिसोड पर खर्च किए जा रहे ये पैसे क्या जनता के नहीं हैं और क्या इनका सदुपयोग हो रहा है. 
जनता को इमोशनली(भावनात्मक रूप से) ब्लैकमेल करने का हथकंडा अगर कांग्रेस अपना सकती है तो मायावती क्यों नहीं. आखिर इंदिरा गांधी ने सत्तर के दशक में देश के गरीबी हटा दी थी. फिर आज राहुल बाबा क्यों चिल्ला रहे हैं कि ये गरीबों का देश है. आखिर क्यों(राहुल के ही शब्दों में) सरकारी पैसा जनता तक नहीं पहुंचती है. आखिर किसने भ्रष्टाचार को बढ़ाया. आखिर किसने भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया. राहुल बाबा ने आखिर क्वात्रोकी ड्रामें में वे विद्रूप क्यों बने रहे.

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2009

पीडीएफ पुस्तक प्रकाशन- तथ्य और विमर्श

पीडीएफ पुस्तक प्रकाशन पर मेरी पोस्ट पर कुछ प्रतिक्रियाएं मिली. पीएन सुब्रह्मण्यन जी ने कहा कि इस विषय पर थोड़ा और विस्तार से बताया जाए. उन्हीं को समर्पित है मेरी ये पोस्ट-
दरअसल, हमारा हिंदी ब्लॉग जगत समृद्ध होता जा रहा है. कुराफातों  हो या व्यक्तिगत टिप्पणियां. ये सब मिलकर हिंदी ब्लॉग जगत को समृद्ध कर रहा है. सैंकड़ों ऐसे ब्लॉग हैं जिनपर स्तरीय हीं नहीं, उच्चस्तरीय लेख मौजूद हैं.  शब्दावली को ही लीजिए, यहां मौजूद पोस्ट हिंदी भाषा विज्ञान की धरोहर हैं. मैंने नॉर्मन लेविस की वर्ड पावर मेड ईजी पढ़ी थी. उन्होंने अंग्रेजी भाषा के शब्दों को याद रखना और समझना आसान बना दिया था. ऐसा ही कार्य अजीत वडनेरकर जी कर रहे हैं. इससे हिंदी भाषा को बहुत फायदा मिलेगा. उनकी रचना ब्लॉग पोस्ट को रूप में है. अगर उस ब्लॉग के सभी पोस्ट को एक जगह समेट कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाता है तो उससे लाखों लोग लाभान्वित होंगे.  
इसी तरह आपके ब्लॉग का विषय जो हो, आप उसे इकट्ठा कर पीडीएफ पुस्तक के रूप में प्रकाशित कर सकते हैं.
उदाहरण के लिए मैंने विकीपीडिया पर निर्वाचित लेखों को ओपेन ऑफिस में ज्यों का त्यों चिपका दिया. फिर इसे सेव एज पीडीएफ फाइल के रूप में सेव कर लिया. और पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया.
देखिए, विकीपीडिया के चौदह निर्वाचित लेखों की ये पुस्तक-

कई कारणों से किताब हटा दिया गया है.
अब आप भी अपने ब्लॉग पोस्ट को ओपेन ऑफिस में चिपकाइये और फिर पीडीएफ बनाकर प्रकाशित करिए.

सोमवार, 26 अक्टूबर 2009

अपना पीडीएफ पुस्तक कैसे प्रकाशित करें

1. सबसे पहले इम्बेडइट साइट पर जाकरपीडीएफ किताब अपलोड करें, लॉग इन करने की जरूरत नहीं है.
(नोट- अपनी पीडीएफ किताब बनाने के लिए, अपनी विषय-वस्तु ओपन ओफिस में चिपकाएं और एक्सपोर्ट एज पीडीएफ फाइल के रूप में सेव कर लें. इम्बेडइट में सीधे आपके कंप्यूटर से पीडीएफ फाइल अपलोड की जा सकती है.)
2. फाइड अपलोड करने के बाद पूछेगा आप गूगल, ट्विटर आदि में से कहां साइन-इन करना चाहते हैं तो आप गूगल चुन लीजिए, हां दूसरा भी चुन सकते हैं.
3. लॉग इन करते ही आपको इम्बेड कोड मिलेगा. उसे आप अपने ब्लॉग के न्यू पोस्ट में जाकर एचटीएमएल में चिपका दीजिए.
3. हां सेव करते वक्त थोड़ी आपत्ति दिखाएगा, उसे स्टॉप शोइंग इरर बॉक्स में क्लिक करे समस्या को दूर सकते हैं. बस चंद सैकेंडों में आपकी किताब प्रकाशित हो गई.
यहां प्रस्तुत है शेखर एक जीवनी का पहला भाग

कई कारणों से किताब हटा दिया गया है.

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

हर इक जिस्म घायल
हर इक रूह प्यासी
निगाहों में उलझन
दिलों में उदासी
ये दुनिया है या
आलमे बद-हवासी
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है..
फिल्म- प्यारा का ये गाना प्रस्तुत है आपकी सेवा में-



जय हिंदी जय भारत

रविवार, 25 अक्टूबर 2009

बीते हुए लम्हों की कसक

बीआर चोपड़ा की सामाजिक उद्देश्यपरक फिल्म निकाह का गीत बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी सुनिए-




जय हिंदी जय भारत

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009

जीवन विद्या का चौदहवां राष्ट्रीय सम्मेलन


जीवन विद्या का 14वां राष्ट्रीय सम्मेलन हैदराबाद में सम्पन्न
डॉ देवकुमार पुखराज
अमरकंटक से आरंभ हुआ जीवनविद्या का कारवां दक्षिण भारत तक पहुंच गया है. अक्टूबर माह के पहले सप्ताह में इसका एक विहंगम नजारा हैदराबाद में देखने को मिला. जहां जीवन विद्या से जुड़े देशभर के २३ केन्द्रों से लगभग २५० लोग एकत्र हुए. दक्षिण भारत में जीवन विद्या का ये पहला और 14 वां राष्ट्रीय अधिवेशन था. हैदराबाद से सटे तुपरान कसबे के अभ्यासा स्कूल में आयोजित यह सम्मेलन कई मामलों में दूसरे सम्मेलनों से भिन्न रहा. आजकल के सम्मेलनों के उलट न तो इसके प्रचार-प्रसार के लिए बैनर- पोस्टर लगे थे और नहीं कहीं होर्डिंग्स.यहां तक की मीडिया वालों को भी आमंत्रण नहीं था. शायद यहीं इस अभियान की खासियत भी है .इसके शिल्पी प्रचार-प्रसिद्धी से दूर रहते हुए शिक्षा के जरिये जन मानस में समझदारी विकसित करने के काम में तन्मयता से जुटे हैं. सम्मेलन में वे लोग हीं अपेक्षित थे जो जीवनविद्या के प्रबोधन, लोकव्यापीकरण और प्रचार में लगे हैं. ऐसे हीं तकरीबन ढाई सौ लोग तुपरान में जुटे जिसमें दक्षिण भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों के प्रतिभागी भी थे. जीवन विद्या के प्रणेता बाबा ए नागराज पूरे चार दिनों तक यहां रहे और प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया.
पहले दिन उदघाटन सत्र में बाबा नागराज ने अनुसन्धान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर मानव ज्ञानी, विज्ञानी और अज्ञानी के रूप में है. मानव ने जाने- अनजाने पृथ्वी को ना रहने लायक बना दिया है. पृथ्वी को रहने योग्य बनाना ही इस अनुसन्धान का उद्देश है. धरती पर उष्मा बढने के कारण ही धरती बीमार होती जा रही है. इस पर शोध अनुसन्धान जरुरी है. इसके लिए मानव को न्याय पूर्वक जीना होगा और स्वयं में समझ कर जीना होगा, यही समस्याओं का समाधान है. उत्पादन कार्य में संतुलन और संवेदनाओं में नियंत्रण से ही अपराध में अंकुश लग सकता है. प्रयोजन के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि कल्पनाशीलता और कर्म स्वतंत्रता हर मानव के पास हैं. इसके आधार पर हर मानव समझदार हो सकता है और व्यवस्था में जी सकता है. उन्होंने नर-नारी में समानता और गरीबी-अमीरी में संतुलन पर जोर दिया. इसी दिन दुसरे सत्र में मुंबई, भोपाल, इंदौर और पुणे के प्रतिनिधियो ने जीवन विद्या आधारित अभियान की समीक्षा और भावी दिशा पर विचार व्यक्त किये. मुंबई से आये डॉ. सुरेन्द्र पाठक ने मुंबई में जीवन विद्या की गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि मुम्बई के सोमैया विद्या विहार के विभिन्न कालेजों में शिक्षको छात्रों के बीच शिविर आयोजित हो रहे हैं. ऐसे ६०० शिक्षकों के २४ छः दिवसीय शिविर विगत दो वर्षों में संपन्न हुए हैं तथा मुंबई विश्वविद्यालय के एक पाठ्यक्रम में जीवन विद्या की एक यूनिट शामिल की गई है. मुंबई के आसपास के शहरों में भी परिचय शिविर आयोजित किये जा रहे है. भोपाल से आई श्रीमती आतिषी ने मानवस्थली केंद्र की गतिविधियों से प्रतिनिधियों को अवगत कराया. इंदौर के श्री अजय दाहिमा और पुणे के श्रीराम नर्सिम्हम ने अपने इलाके में चल रही गतिविधियों की जानकारी दी. यह भी बताया गया कि उत्तरप्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय ने अपने सभी ५१२ कालेजो में 'वेल्यु एजूकेशन एंड प्रोफेशनल एथिक्स' जीवन विद्या आधारित फाउनडेशन कोर्से लागु किया है जिसकी टेक्स्ट बुक भी छप गई है. और विद्यार्थियों के लिए वेबसाईट बनाकर भी पाठ्य सामग्री उपलब्ध करा दी गई है. अगले सत्र में रायपुर, ग्वालियर, बस्तर, दिल्ली, बांदा, चित्रकूट आदि केंद्र ने अपनी प्रगति से अवगत कराया. रायपुर से आये श्री अंजनी भाई ने बताया की अभ्युदय संस्थान में छत्तीसगड़ राज्य के १०० शिक्षको का छः महीने का अध्ययन शिविर चल रहा है ये शिक्षक २० दिन प्रशिक्षण लेते है और १० दिन अपने-अपने क्षेत्रों में शिविर लेते हैं. राज्य में दस हजार से भी ज्यादा शिक्षको के शिविर हो चुके है. गत २९ सितम्बर को राज्य के मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह ने अभ्भुदय संस्थान का अवलोकन किया और पूज्य बाबा नागराज जी से अभियान पर चर्चा की. वहां उन्होंने प्रशिक्षण ले रहे शिक्षको को संबोधित किया तथा प्रशिक्षण के दौरान हुए उनके अनुभवों को भी सुना. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने घोषणा कर दी कि राज्य के आईएएस, आईपीएस और आईएफएस आधिकारियो को भी एक हफ्ते के प्रशिक्षण के लिए अभ्भुदय संस्थान भेजा जायेगा.

दूसरे दिन मानवीय शिक्षा संस्कार व्यवस्था, लोक शिक्षा योजना, शिक्षा संस्कार योजना पर बाबा नागराज जी विचार रखे .उन्होंने कहा कि हर आदमी हर आयु में समझदार होने की क्षमता रखता है. वर्त्तमान प्रणाली में पैसा बनाना ही समझदारी मान लिया गया है. मानव चेतना को सही तरीके से ना पहचाने के कारण यह गलती हुई हैं. इसके लिए उन्होंने मध्यस्थ दर्शन के आलोक में निकाले गए निष्कर्षों के बारे में बताया. इसमें मानव व्यवहार दर्शन, मानव कर्म दर्शन, अभ्यास दर्शन और अनुभव दर्शन की व्याख्या की. साथ साथ उन्होंने कहा कि चारों अवस्थाओं में संतुलन से जीने की समझ ही विचार है . यहाँ पर उन्होंने भोगोन्मादी समाजशास्त्र की जगह व्यवहारवादी समाजशात्र, लाभोंमादी अर्थशास्त्र की जगह पर आवर्तनशील अर्थशास्त्र और कमोंमादी मनोविज्ञान के स्थान पर संचेतनावादी मनोविज्ञान को, शिक्षा की वस्तु बनाये जाने की आवश्यकता को निरुपित किया. दूसरे दिन ही बिजनौर, कानपुर, जयपुर, हैदराबाद, बंगलोर, चेन्नै, कोचीन, हरिद्वार आदि केन्द्रों के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रो में चल रही गतिविधियों से वृत प्रस्तुत किया. इसी दिन एक सत्र श्री साधन भट्टाचार्य जी के संयोजकत्व में परिवार

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मूलक स्वराज व्यवस्था पर हुआ जिसमें प्रवीण सिंह, अजय दायमा, डॉ. प्रदीप रामचराल्ला ने विचार रखे . दूसरा सत्र डॉ. नव ज्योति सिंह के संयोजकत्व में शोध, अनुसन्धान, अवर्तानशील कृषि पर हुआ जिसमें बांदा के श्री प्रेम सिंह, आइआइआइटी के शोधार्थी हर्ष सत्या, मृदु आदि ने अपने विचार व्यक्त किये.

तीसरे दिन बाबा नागराज जी ने कहा कि अस्तित्व में व्यापक वस्तु ही ऊर्जा हैं. पदार्थावस्था में भौतिक-रासायनिक
क्रियायें ऊर्जा सम्पनता के कारण से हैं. ज्ञान सम्पनता होना ही सहस्तित्व में जीना है. अभी तक आहार, आवास, अलंकार, दूरगमन, दूरदर्शन, दूरश्रवण पर हीं अध्ययन हुआ है. सहस्तित्व को पकडा नहीं है, इसलिए मानव का अध्ययन नहीं हुआ. सहस्तित्व को समझने और उस में जीने से एकरूपता बनती है. बाबा कहते गये,जीवन एक गठन
पूर्ण परमाणु है, उसमे दस क्रियाएँ होती हैं. अभी तक मनुष्य साढ़े चार क्रियाओं पर हीं जीता रहा है. इसी से व्यक्तिवाद और समुदायवाद का जन्म हुआ. और इसी से संघर्ष और शोषण युद्ध होता है. उन्होंने कहा कि मानवीय समस्यओं का समाधान सहस्तित्व विधि से ही होगा. सहस्तित्व का ज्ञान होना ही लक्ष्य है. इसका ज्ञान हमें जीवन का अध्ययन , मानवीय आचरण का अध्ययन और अस्तित्व के अध्ययन से ही पूरा होगा. बाबा ने समझ के रूप में शरीर पोषण-संरक्षण के लिए आहार, आवास, अलंकार, दूरगमन, दूरदर्शन, दूरश्रवण छह आकांक्षाओं को बताया है.


जीवन के सम्बन्ध में न्याय, धर्म, सत्य को समझना जरुरी है. प्रकृति के संबंध में नियम, नियंत्रण, संतुलन के रूप में जीना समझना जरुरी है. सार रूप में सार्वाभोम व्यवस्था के लिए प्रकृति की चारों अवस्थाओं में सहस्तित्व, परस्पर पूरकता और संतुलन को समझना जरुरी है. इसी दिन के एक सत्र में श्री रणसिंह आर्य ने जन अभियान के सन्दर्भ में समाधान के लिए प्रयास पर अपने विचार व्यक्त किये. एक अन्य सत्र में आईआईआईटी ,हैदराबाद के निदेशक डॉ. राजीव सांगल, श्री सोम देव त्यागी, मृदु , सुनीता पाठक, भानुप्रताप आदि ने लोक शिक्षा और शिक्षा संस्कार व्यवस्था पर चर्चा को आगे बढाया. श्री सोम देव त्यागी ने रायपुर में हो रहे प्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला.
चौथे दिन सार्वभोम व्यवस्था पर अपने विचार व्यक्त करते बाबा नागराज ने कहा कि अध्ययन पूर्वक न्याय और व्यवस्था को समझा जा सकता है. और समझकर प्रमाणित किया जा सकता हैं. सार्वभोम व्यवस्था की समझ से ही मानव, जीव चेतना से मानव चेतना में संक्रमित होकर व्यवस्था में भागीदारी का निर्वाह जिम्मेदारी पूर्वक कर सकता है. अभी तक मानव कार्य कलाप सुविधा-संग्रह तक ही है. मानव न्याय सत्य को प्रमाणित करने में असफल रहा है. समझदारीपूर्वक जीते हु्ए मानव सुखी व भय मुक्त हो सकता है ,इसके लिए धरती पर मानव मानसिकता से संपन्न व प्रमाणित व्यतियों द्वारा शिक्षा संस्कार के द्वारा मानव मानसिता से संपन्न पीड़ी तैयार हो सकती है. जो व्यवस्था पूर्वक जीकर मानवीयता व सहस्तित्व को प्रमाणित करेगी. चौथे और अंतिम दिन आज की दशा एवं समाधान की दिशा सत्र में डॉ. प्रदीप रामचर्ल्ला, अभ्यासा स्कूल के संस्थापक विनायक कल्लेतला, राजुल अस्थाना, श्री सोमदेव, प्रोफेसर राजीव सांगल ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये. सम्मेलन के दूसरे कई सत्रों को आई आई आई टी,हैदराबाद निदेशक डॉ राजीव सांगल, डॉ. प्रदीप रामचर्ल्ला, प्रोफेसर गणेश बागडिया, रणसिंह आर्य, श्री साधन भट्टाचार्य , श्री सोम देव, श्रीराम नरसिम्हन, सुमन, विनायक आदि ने संबोधित किया..

सम्मेलन में प्रतिनिधियो के ठहरने और खाने की व्यवस्था स्कूल प्रबंधन ने की थी. इसकी दिनचर्या भी सधी हुई थी. सुबह योग -प्राणायाम का छोटा सत्र चलता फिर नास्ते के बाद प्रतिभागी जीवनविद्या अभियान की समीक्षा और भावी योजनाओं पर चर्चा में जुट जाते. यहां तक की बाबा नागराज भी संबोधन के बाद प्रश्नोत्तरी के लिए समय देते. आपसी संवाद और समन्वय का अनोखा नजारा चार दिनों तक दिखा. अगले साल उत्तरप्रदेश के बांदा में फिर मिलने की घोषणा के साथ राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया.
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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009

पुरानी पटकथा पर पुरानी वीडियो


करीब एक साल पहले बिहार के बाढ़ पर मैंने ये पटकथा लिखी थी. तकनीकी कारणों से वीडियो नहीं बना सका. अब जाकर ये वीडियो बन पाया है.

रविवार, 18 अक्टूबर 2009

आपकी जरूरत के तमाम मुफ्त सॉफ्टवेयर- सॉफ्टवेयर

  1. ऐड-मंचर-

    विज्ञापन की वजह अगर कोई साइट खुलने में दर कर रही हो, तो आप विज्ञापन के बगैर भी साइट खोल सकते हैं. इसके लिए आपको ऐड-मंचर इंस्टॉल करना होगा. एड-मंचर साइट से विज्ञापन को वैसे ही खा जाता है जैसे भैस घास.



  2. एवीजी विषाणुरोधी- कंप्यूटर में विषाणुओं के संक्रमण का खतरा है जब आप जाल का विचरण कर रहे होते हैं. ऐसे में आपको किसी मजबूत सुरक्षा तंत्र की सुरक्षा चाहिए. एवीजी वैसा ही मजबूत सुरक्षा तंत्र है. निजी उपयोग के लिए यह मुफ्त है. मैं पिछले दो सालों से उपयोग कर रहा हूं कही कोई शिकायत नहीं है.


शनिवार, 17 अक्टूबर 2009

भूख का दर्द

भूख लेखकों, कवियों, कलाकारों का पसंदीदा विषय रहा है, लेकिन यह सबसे पसंदीदा विषय रहा है लेखकों का. नेता इसी शब्द की कलाबाजियां दिखाकर चुनाव जीतते हैं, मगर दुर्भाग्य है कि वहीं नेता इस भूख को मिटाने के बड़े-बड़े दावे भी करते हैं. नेताओं के इस दोमुंहेपन से भूख बहुत ही दुखी है, भूख के ही मुंह से ही सुनिए.. उसके दर्द की कहानी.

<span title=भूख" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiadVt3mzQaPwiiSUaPGvuZAcRLXegEvOMtrCD75yD1OcLTdq4WoG-xYjloAHd67nbZiabT8GwbS1gd7GT8coRVwxK0cgUVNKss-KYmf8YE3X_ssyCqBjGm5RwX_1UbkryUO8M36TyXPDez/?imgmax=800" style="border-bottom: 0px; border-left: 0px; border-right: 0px; border-top: 0px; display: inline;" title="भूख" border="0" height="129" width="124"> <span title=भूख1" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgBWwXR8eypT9OxybR6ddl9CCuqiKPsb6eQicw0T1Vy3xT5TTy0eFi1mShhBL892Cre2nzXHeIHbF4MhIiW8IL3xR-QWZVfUcV7BZRFzyBH-7Uc2I3ch9tui_Tf8PVT7TrepqdVpIHItT6D/?imgmax=800" style="border-bottom: 0px; border-left: 0px; border-right: 0px; border-top: 0px; display: inline;" title="भूख1" border="0" height="131" width="88"> <span title=भूख2" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiDnsqnAlTEQ88rA2EPkYGOP2HpTSA32c5Ckvi-6IJ78QR7lDOY8HJSV4ScGyXDsKBzhL91f36oMaDAiwydQmdeNQzfChpfwO9Cm65GZ-gRlgQ5xQcwibOnbdk7UErXjBfLd1TlGFvT7PG1/?imgmax=800" style="border-bottom: 0px; border-left: 0px; border-right: 0px; border-top: 0px; display: inline;" title="भूख2" border="0" height="131" width="122"> <span title=भूख3" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjOG9hvxPSWXgr9bdPfw3RZY5Vi-amiyzq_6yrlbZxuw_MeooXZjHGsiDRVRtqTk2gX3jVE9WNCxZ1GPc6a3yHl7Yop18tDnFWtMROX8wiv0QCc1AlqgqI2HMGsuCFzEbc2yr8mu5C_D_c3/?imgmax=800" style="border-bottom: 0px; border-left: 0px; border-right: 0px; border-top: 0px; display: inline;" title="भूख3" border="0" height="134" width="107"> <span title=भूख4" src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiYeYZNEm1N8Y_KQDbWEd_Hz2hzJAz-jKaAmKjry6Nizu69c4CllNM-TnGIxZ5desAfcOPPjdxmfItqtei59_nA-bxL6kmm0caxXv6_nqFt6TIU7UF2Zgq3FCSLDmxGZAkaZoGgBOZSXgW0/?imgmax=800" style="border-bottom: 0px; border-left: 0px; border-right: 0px; border-top: 0px; display: inline;" title="भूख4" border="0" height="134" width="115">

मैं भूख हूं, शायद दुनिया का सबसे प्रभावशाली शब्द, शायद सबसे ताकतवर भाव. भूख इंसान को भीख मांगने के लिए मजबूर कर देता है. भीख मांगने वाले को लोग भिखारी कहते हैं, उससे घृणा करते हैं.. मगर एक कवि जब कहता है..


वह आता

दो टूक कलेजे को करता

पछताता पथ पर आता

पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक

चल रहा लकुटिया टेक

मुट्ठी भर दाने को

भूख मिटाने को

वह आता

दो टूक कलेजे को करता

पछताता पथ पर आता

भिखारी को भिक्षुक कहने वाला यह कवि महाकवि बन जाता है.

एक दूसरा कवि कहता है..

स्वानों को मिलते दूध-वस्त्र

व्याकुल बच्चे अकुलाते हैं

मां की हड्डी से चिपक ठिठुर

जाड़े की रात बिताते हैं


और यह कवि राष्ट्र कवि बन जाता है.

मैंने यानी भूख ने कितने ही कवियों, लेखकों, फिल्मकारों को नाम, अपार शोहरत और दौलत दी, उस भूख को ही हमारे नेता मिटाने की बात करते हैं. आप ही सोचिए किसी को मिटाने की बात करना कितना बड़ा गुनाह है. ये बात कोई चोरी चुपके नहीं करता बल्कि मुझे मिटाने के लिए लोग घोषणाएं करते हैं. कांग्रेस कहती है कि गरीबी हटाओ, तो भाजपा कहती है भय, भूख और भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा को वोट दें. मुझे मिटाने की बात सिर्फ भारत के ही नेता नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत संयुक्त राष्ट्र से भी होती रहती है.

आखिर मुझमें क्या कमी है जो लोग मुझे मिटाना चाहते हैं. मैं दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती हूं. मुझपर हर कोई विजय पाना चाहता है. लेकिन मैं मिटनेवाली नहीं हूं, आसानी से तो बिल्कुल ही नहीं. मैं बहुत ताकतवर हूं, लेकिन जब इंसान मेरी वजह से मौत के मुंह में जाता तो, तो मेरा दिल भी द्रवित हो जाता है, मैं भी रोने लगती हूं. आखिर हर उस इंसान के साथ मेरी भी तो मौत होती है. इंसान एकबार मरता है और मैं बार-बार मरती हूं. मुझे भी इससे छुटकारा चाहिए. लेकिन मैं खुद ही नहीं मिट सकती हूं न. मुझे मिटानेवाला कोई चाहिए. अगर कोई मेरी बात सुन रहा हो तो मैं उससे कहना चाहती हूं कि जितना पैसा, जितना संसाधन तुम हथियार बनाने में खर्च करते हो, उसका एक चौथाई भी अगर मुझपर खर्च कर दो तो मैं मिट सकती हूं. अंत में, मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूं कि घोषणाएं करना छोड़ो और सच्चाई को कबूलो, नहीं तो मैं बार-बार और हरबार तुमको चुनौती देती रहूं.

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2009

आपकी जरूरत के तमाम मुफ्त सॉफ्टवेयर-2

  1. विंडोज लाइव राइटर- हृदयांजलि के इस पृष्ठ पर आप जो पोस्ट देख रहे हैं वो विंडोज लाइव राइटर द्वारा प्रकाशित किए गए हैं. आप अपने ब्लॉग पोस्ट को और भी बढ़िया तरीके से लिखकर प्रकाशित कर सकते हैं. आप अपने कंप्यूटर में मौजूद चित्र, वीडियो आदि आसानी से अपने पोस्ट में जोड़ सकते हैं. आपको अपने पोस्ट को सजाने के लिए ऑनलाइन रहने की जरूरत नहीं है. ऑफ लाइन सजाइये और ऑनलाइन रहते हुए प्रकाशित कर डालिए. फोटो एलबम, तालिका, वीडियो आदि सबकुछ. आजमाइये.overview
  2. ओपेरा- ओपेरा एक बहुत ही बढ़िया, सुरक्षित और तेज जाल-विचरक यानी ब्राउजर है. आजमा सकते हैं मर्जी आपकी.thumb-panels
  3. केएमपी प्लेयरकेएमपी प्लेयर मेरा पसंदीदा ओडिया-वीडियो प्लेयर है. मैं इसे करीब डेढ़ साल से प्रयोग में ला रहा हूं. अच्छा क्या, मेरे लिए सबसे अच्छा प्लेयर है. इसकी त्वचा काफी सुंदर है. देखिए. 1434_KMPlayer1434

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2009

बुद्धिजीवियों का क्रूर चेहरा

देश के लिए कलंक बन चुके तथाकथित बुद्धिजीवियों और सेल्युलरों का एक और क्रूर चेहरा सामने आया है. इन लोगों ने केंद्र सरकार की उस योजना के खिलाफ तर्राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है, जिसके तहत केंद्र सरकार नवंबर के पहले सप्ताह से नक्सल प्रभावित राज्योंNaxalism महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल में माओवादियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने जा रही है. इन लोगों ने प्रधानमंत्री के नाम एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है. पत्र में लिखा गया गया है कि
सरकार महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की योजना को तत्काल वापस ले. क्योंकि इस कार्रवाई से जंगल में रह रहे लाखों गरीब और आदिवासी बेघर होंगे, उनके सामने पुनर्वास की समस्या आ खड़ी होगी. इससे गरीब लोगों की पहले से खराब हालत और खराब हो जाएगी. और इससे जबरदस्त मानवीय त्रासदी पैदा होगी. इस अभियान से आदिवासियों का अपमान होगा और मानवाधिकार का व्यापक उल्लंघन होगा. आगे पत्र में कहा गया है कि पहले ही विभिन्न सरकारी अभियानों से छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और सैंकड़ों की संख्या में लोग मारे जा चुके हैं. नई योजना से देश में गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हो जाएगी. इसलिए सरकार को ये योजना तत्काल वापस ले लेना चाहिए.
इतना ही नहीं, पत्र में सीधे सीधे माओवादी नक्सलियों का समर्थन भी किया गया है.
माओवादी नक्सली बहुराष्ट्रीय कंपनियों और सेज के खिलाफ आदिवासियों की लड़ाई में मदद कर रहे हैं और ऐसे में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई करने से देश में भयानक गृहयुद्ध फैल जाएगी और इससे जबरदस्त मानवीय त्रासदी पैदा होगी. जिससे निपटना सरकार के लिए मुश्किल हो जाएगा.

प्रधानमंत्री के नाम लिखे इस खुले पत्र में हस्तक्षर करने वालों में अरुंधती राय, दीपांकर भट्टाचार्य, सुप्रीमकोर्ट के कई वकील, दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया के कई शिक्षक और छात्रों के अलावा विदेशों के भी कई लोग शामिल हैं.

इन तथाकथित क्रूर बुद्धिजीवियों के बारे में लिखना उचित नहीं था, लेकिन इनका कलंकित चेहरा बार-बार सामने लाना जरूरी हो जाता है. आखिर ये लोग चाहते क्या हैं.  इन्होंने नेपाल में राजशाही के खिला फ माओवादियों का समर्थन किया था. उस समय सीताराम येचुरी जैसे लोग भी माओवादियों का बचाव करते थे, लेकिन पश्चिम बंगाल में उनकी ही सरकार के खिलाफ जब वामपंथियों का आतंक शुरू हो गया तो सीताराम येचुरी और बुद्धदेव भट्टाचार्य चिल्लाने लगे कि नक्सलियों के पास कोई विचारधारा नहीं है और इसका सफाया जरूरी है. सीताराम येचुरी ने तो यहां तक कहा है कि जितने लोग का कत्ल तालिबान ने नहीं किया होगा उससे ज्यादा लोग गढ़चिरौली में नक्सलियों की हिंसा में मारे गए. उनका कहना ये भी है कि जो लोग संवाद की भाषा नहीं, हिंसा की भाषा समझते हैं उन्हें हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाना चाहिए. जबकि सीपीएम महासचिव प्रकाश करात अभी भी नक्सल समस्या का राजनीतिक समाधान चाहते हैं न कि प्रतिहिंसा.

सीपीएम के अंदर ही विचारधारा का द्वंद्व है. दरअसल ये द्वंद्व सत्ता और विचारधारा के बीच है. विचारधारा कहती है कि नक्सलियों को पालो जबकि सत्ता कहती है कि ये नक्सली तुम्हारे हाथ से हमें छीन लेंगे. पश्चिम बंगाल सरकार सत्ता गंवाने के ख्याल से डरकर नक्सलियों के खिलाफ केंद्र की योजना का समर्थन कर रहे हैं.

मगर, उनलोगों का क्या जो अकेले पश्चिम बंगाल से खुश नहीं हैं, वो भी  उस स्थिति में जब तृणमूल का राहु उससे दिनों-दिन ग्रसता जा रहा है. ये लोग पूरे देश में नक्सलियों का शासन चाहते हैं, इन लोगों का सपना चीन की तरह भारत में भी कम्युनिष्ट शासन स्थापित करना है. 

बुधवार, 14 अक्टूबर 2009

आपकी जरूरत की तमाम मुफ्त सॉफ्टवेयर

  1. ऑपन-ऑफिस:- ओपन ऑफिस एम एस ऑफिस का बहुत ही अच्छा और मुफ्त विकल्प है.  इसमें फाइल को पीडीएफ में भी जमा करने का विकल्प मौजूद है. साथ ही यह ग्राफिक्स और स्प्रीड शीट के रूप में बेहतर कार्य करता है.
  2. सुमात्रा पीडीएफ:- एडोब रीडर का बेहत विकल्प.  मात्र डेढ़ एमबी का छोटा फाइल.
  3. फॉक्सिट रीडर- एडोब रीडर का बेहतर विकल्प. एकदम तेज और तंदुरुस्त. साथ ही छोटा भी.
  4. फायर-फॉक्स- इस अंतर्जाल विचरक यानी ब्राउजर का को जवाब नहीं, दुनिया के बहुत से लोग इसके मुरीद हैं. मैं भी हूं. आप भी हो जाएंगे. एकदम तेज, सुरक्षित और बढ़िया.

काम के मुफ्त सॉफ्टवेय

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सोमवार, 12 अक्टूबर 2009

लिंगोज आपके लिए बढ़िया डिक्शनरी

अंतर्जाल पर दर्जनों डिक्शनरी मौजूद हैं. wordnet से लेकर oxford तक. लेकिन lingoes क्या कहना! लिंगोज एक साथ कई डिक्शनरियों की सुविधा देता है. साथ ही करेंसी कनवर्टर, वेट कनवर्टर, एडवान्स्ड कलकुलेटर, आदि बहुत कुछ. इसके साथ आप ग्रामर भी लोड कर सकते हैं. यानी जैक ऑफ मेनी ट्रेड्स एंड मास्टर ऑफ ऑल.
http://www.lingoes.net/en/lingoes128_8

बोल अनमोल बोल

याचना
मो सम दीन, न दीन हित, तुम समान रघुवीर।
अस विचारी रघुवंश मणि, हरहुं विषम भव भीर।।

कामी नारि प्यार जिमि, लोभी के प्रिय दाम।
तुम रघुनाथ निरंतर, प्रिय लागहि मोहि राम।।

मैं अपराधी हीन मति, पड़ौं मोह के जाल
मम कृत दोष न मानिए, तुम प्रभु दिन दयाल।।

अजगर करे ना चाकरी, पंछी करे न काम।
सात खंड नौ द्वीप में, सबके दाता राम।।

प्रेम
प्रेम न बाड़ि ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय।
राजा प्रजा जेहिं रूचै, शीश देय ले जाय।।

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटै पै फिर न जुड़ै, जुड़ै गांठ पड़ि जाय।।

गुरू--
गुरू कुम्हार शिष्य कुंभ हैं, गढ़ि-गढ़ि काटत खोंट।
अंतर हाथ सहार दे, बाहर मारे चोट।।

अखंड मंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरं।
तद पदं दर्शितम येन, तस्मै श्री गुरूवे नम:।।

अज्ञान तिमिरांधस्य ज्ञानानं येन शलाकया।
चक्षुन्मीलित: येन तस्मै श्री गुरूवे नम:।।

जय हिंदी जय भारत

शनिवार, 10 अक्टूबर 2009

ओबामा को नोबेल शांति पुरस्कार

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई है. पारंपरिक रूप से अल्फ्रेड नोबेल के मृत्यु दिवस यानी दस दिसंबर को उन्हें यह सम्मान दिया जाएगा. नोबेल दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार है. ओबामा को नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा के साथ ही बहस शुरू हो गई है कि आखिर नोबेल शांति पुरस्कार ओबामा को ही क्यों दिया गया. आखिर ओबामा ने ऐसा कौन सा उल्लेखनीय कार्य किया है जिसके लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है.
तर्क विदों का कहना है कि वे आतंकवादी देश अमेरिका के ऐसे राष्ट्रपति हैं जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की बात करते हैं. अमेरिका इसलिए आतंकवादी देश कहा जाता है क्योंकि वहां कुछ महीनों पहले तक बुश जैसा सनकी राष्ट्रपति था, जिसने दुनिया में उथल-पुथल मचा दिया. विश्व जनमत की अनदेखी कर, अपनी खुफिया एजेंसियों के हाथों झूठी रिपोर्ट तैयार कराकर, इराक में सामूहिक नरसंहार के झूठे हथियारों का दुनिया को भय दिखाकर उसने इराक पर हमला कर दिया. ईरान पर हमले की तैयारी कर चुका था. एक ऐसा सनकी जिसने दुनिया को वैश्विक आर्थिक संकट के दलदल में धकेल दिया.
ऐसे देश में एक संत का पैदा होना नोबेल समिति के लिए भी अचरज के कम नहीं है. ओबामा जो शुरू से लेकर अंत तक मुस्लिम देशों को बार-बार आश्वत करने की कोशिश करते है. वचन से ही नहीं, मन और कर्म से भी, वह आश्वत करते हैं कि अमेरिका सबके साथ मिलजुल कर रहना चाहता है. विश्व की समस्याओं को हल करने में वह सबकी मदद चाहता है
वह स्वीकार करता है कि अति लालच की वजह से अमेरिका ने दुनिया को मंदी की दलदल में धकेला. वह वित्तीय संस्थाओं के अधिकारियों को लालच कम करने और बोनस नहीं लेने की बात करता है
दुनिया के सबसे ताकतवर देश का राष्ट्रपति अगर सीधे मुस्लिम जगत को संबोधित करते हुए ये कहता है कि वो उसे अपना दुश्मन नहीं समझें, हम आपसी हित और एक-दूसरे का आदर करते हुए आगे बढ़ेंगे. पिछले दिनों हमने कुछ गलितयां की थी. जिसे हम सुधारने की कोशिश करेंगे
राष्ट्रपति पद का शपथग्रहण करते हुए उन्होंने जो बात कही, मुस्लिम जगत को जो भरोसा दिलाया वो आज भी उसी राह पर कायम हैं. उस बात पर अडिग हैं
कुल मिलाकर, एक बेहतर दुनिया के निर्माण में बराक ओबामा की लघुकालिक भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
जय हिंदी जय भारत